दक्षिण भारत की राजनीति से आमतौर पर उत्तर में लोगों को ज्यादा मतलब नहीं होता है। फिर भी जब दक्षिण के राज्यों में कुछ दिलचस्प राजनीति हो रही हो या कुछ बड़ा बदलाव होता दिखता तो लोग दिलचस्पी लेते हैं। जैसे फिल्म स्टार विजय के तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने पर सबकी नजर थी। ऐसे ही अगले कुछ दिन में दक्षिण के तीन राज्यों में तीन महिला नेताओं की राजनीति पर नजर रखने की जरुरत होगी। तमिलनाडु में कनिमोझी, तेलंगाना में के कविता और आंध्र प्रदेश में वाईएस शर्मिला ये तीन ऐसी नेता हैं, जो बड़े नेताओं की बेटी हैं और स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व बनाना चाहती हैं। इसलिए इन तीनों की राजनीति पर नजर रखने की जरुरत है।
कनिमोझी की राजनीति सबसे दिलचस्प हो सकती है। अभी तक वे अपने भाई एमके स्टालिन की छाया में थीं। अब स्टालिन नेपथ्य में जा रहे हैं और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन कमान संभाल रहे हैं। लेकिन डीएमके के नेता मान रहे हैं कि उनसे पार्टी को फायदा नहीं होगा। इसलिए कनिमोझी को आगे लाने का प्रयास हो रहा है। डीएमके ने लोकसभा में अपने को कांग्रेस से अलग कर लिया है। अगर दिल्ली में कनिमोझी के जरिए डीएमके और भाजपा नजदीक आते हैं तो एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे ही के कविता ने तेलंगाना में अलग पार्टी बना ली है। अब उनके पिता भी राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं हैं और उनका मुकाबला अपने भाई केटी रामाराव से है। वहां भी भाजपा के साथ कविता का बेहतर तालमेल बन सकता है। शर्मिला अभी कांग्रेस में हैं, जिसके खिलाफ आंध्र के लोगों का गुस्सा ठंडा नहीं पड़ा है। तभी शर्मिला भी अपनी नई पोजशनिंग की तैयारी में हैं।
