थोड़े दिन पहले तक देश के तीन बड़े राज्यों में कांग्रेस ने भूमिहार अध्यक्ष बना रखे थे। इसकी तुलना 2014 से ठीक पहले की भाजपा से की जाती थी, जब तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में उसके भूमिहार अध्यक्ष थे। बिहार में सीपी ठाकुर, झारखंड में रविंद्र राय और उत्तर प्रदेश में सूर्य प्रताप शाही अध्यक्ष थे। नितिन गडकरी ने अध्यक्ष रहते तीनों को नियुक्त किया गया। उसके बाद जब 2024 में इन तीन राज्यों में कांग्रेस के भूमिहार अध्यक्ष हुए तो यह टोटका बताया जाता था कि जैसे भाजपा ने तीन भूमिहार अध्यक्ष रखा और लोकसभा का चुनाव जीता वैसे कांग्रेस भी जीत सकती है। कांग्रेस जीती तो नहीं लेकिन उसकी सीटें दोगुनी हो गईं।
उसके बाद यानी 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एक एक करके तीनों को हटा दिया गया। पहले झारखंड के कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर की विदाई हुई। उनकी जगह पिछड़ी जाति से आने वाले केशव महतो कमलेश अध्यक्ष बनाए गए। उसके बाद बिहार में अखिलेश प्रसाद सिंह की विदाई हुई। उनकी जगह दलित समाज के राजेश राम को अध्यक्ष बनाया गया। अंत में उत्तर प्रदेश से अजय राय की विदाई हुई है। उनकी जगह ब्राह्मण समाज की आराधना मिश्रा उर्फ मोना मिश्रा को अध्यक्ष बनाया गया है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अजय राय ने वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसीने छुड़ा दिए थे। कोई 10 राउंड तक की गिनती में वे आगे चल रहे थे। वे हारे लेकिन प्रधानमंत्री की जीत का अंतर पांच लाख से डेढ़ लाख वोट पर ले आए। आबादी के हिसाब से भूमिहारों का ज्यादा असर नहीं है लेकिन राजनीतिक असर बहुत है।
