भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम के गठन के बाद भाजपा के संसदीय बोर्ड में बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में फेरबदल की चर्चा चल रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक के बाद एक रिक्तियां पैदा हो रही हैं। इससे लग रहा है कि जल्दी ही मोदी अपनी सरकार में फेरबदल करेंगे। अब वे अपनी तीसरी सरकार के मिडटर्म में पहुंच गए हैं। इस बीच भाजपा संसदीय बोर्ड में भी रिक्तियां बनने लगी हैं। इससे लग रहा है कि संसदीय बोर्ड में बदलाव की भी शुरुआत हो गई है। पहली रिक्ति सुधा यादव की बनी है। हरियाणा की रहने वाली भाजपा नेता सुधा यादव को राज्यपाल बनाया गया है। वे कर्नाटक राजभवन में थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी। पहले भी कहा जा रहा था कि सुधा यादव की संसदीय बोर्ड से विदाई होगी।
अब इस बात की चर्चा है कि उनकी जगह कौन लेगा। संसदीय बोर्ड में एक महिला को जगह मिलेगी। अभी इकलौती महिला सुधा यादव थीं। कई साल से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम की चर्चा चल रही है। जब सुधा यादव संसदीय बोर्ड में शामिल की गई थीं तब भी निर्मला के नाम की चर्चा थी। लेकिन पिछले 12 साल से नरेंद्र मोदी और अमित शाह की राजनीति देखने के बाद अब कम से कम एक अनुमान लगाना बहुत आसान हो गया है। वह ये कि ये दोनों किसी हाई प्रोफाइल नाम की चर्चा तो कराते हैं लेकिन जगह तय करने की बारी आती है तो सबको चौंका देते हैं। हाल में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के जो आठ नाम तय किए गए हैं उनमें से किसी के नाम की भविष्यवाणी किसी ने नहीं की थी। जिन नामों की चर्चा थी उनमें से किसी को जगह नहीं मिली। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि निर्मला सीतारमण आ ही जाएंगी। हो सकता है कि किसी और महिला का नाम हो, जो सबको चौंका दे। लेकिन यह तय है कि एक महिला संसदीय बोर्ड में शामिल की जाएगी। एक महिला के अलावा एक दलित, एक ओबीसी, एक आदिवासी, एक मुख्यमंत्री और एक महामंत्री को संसदीय बोर्ड में जगह मिल सकती है।
चार लोग तय हैं, जिनमें से तीन लोग पदेन हैं। पार्टी अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और संगठन महामंत्री पदेन सदस्य होंगे। इन तीन के अलावा अमित शाह की जगह भी आरक्षित हैं। पहले यह माना जाता था कि सभी पूर्व अध्यक्ष इसके सदस्य होंगे। लेकिन नितिन गडकरी को संसदीय बोर्ड में नहीं रख कर इस नियम को भंग कर दिया गया। इसलिए राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा बाई डिफॉल्ट संसदीय बोर्ड में शामिल होने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। हालांकि इन दोनों के रहने की संभावना है। जिनके हटाए जाने की चर्चा है उनमें कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा हैं, पंजाब के नेता इकबाल सिंह लालपुरा, ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष रहे के लक्ष्मण और पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया का नाम शामिल है। जिस समय इन लोगों को संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था उस समय भी सबको हैरानी हुई थी। येदियुरप्पा को छोड़ कर किसी का कोई बहुत बड़ा राजनीतिक कद अपने राज्य में नहीं था। फिर भी उनको भाजपा में फैसला करने वाली सर्वोच्च बॉडी का सदस्य बनाया गया। किसी को अंदाजा नहीं होगा कि इन्होंने वहां क्या भूमिका निभाई। अब ये सभी वहां से विदा हो ..जाएंगे।
