आमतौर पर सरकार का काम जनता की समस्याओं को दूर करना होता है। लोकतंत्र में उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी जनता के प्रति होती है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के मामले में सरकार जनता की बजाय ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ है। कंपनियां भी सरकार का खुल कर समर्थन कर रही हैं। तभी दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में से एक टोयोटा ने देश के एक जाने माने इन्फ्लूयंसर मनीष कश्यप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यह भी हैरान करने वाली बात है। आमतौर पर नागरिक कंपनियों के खिलाफ मुकदमा कराते हैं या उलटी गंगा बह रही है। गाड़ी के इंजन में गड़बड़ी आने की शिकायत करने पर कंपनी ने शिकायत करने वाले नागरिक पर मुकदमा दर्ज कराया है।
ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर है कि शिकायत करने वाले इन्फ्लूएंसर मनीष कश्यप ने टोयाटा कंपनी की गाड़ी में गड़बड़ी नहीं बताई है। उन्होंने दावा किया है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वजह से इंजन में पानी पहुंच जाता है, जिससे इंजन में गड़बड़ी आ जाती है। उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ी बिल्कुल नई है और 12 हजार किलोमीटर चलने पर ही खराब हो गई है। वे इस गड़बड़ी का पूरा ठीकरा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर फोड़ रहे हैं। लेकिन मुकदमा टोयोटा ने कराया है। सरकार कह रही है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन में कोई गड़बड़ी नहीं आ रही है। लेकिन टोयोटा को लग रहा है कि इस प्रचार से उनकी छवि प्रभावित हो रही है। ध्यान रहे इथेनॉल के मामले में टोयोटा ने खुल कर सरकार का साथ दिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। फिर भी यह मुकदमा तो अजीब ही है। उपभोक्ता अगर किसी उत्पाद की शिकायत कर रहा है तो उसकी जांच कराने की बजाय उसके ऊपर मुकदमा कराना, नए भारत का चलन है।
