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आईएएस अधिकारी अब पवित्र गाय नहीं हैं

कुछ समय पहले तक यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि कोई आईएएस अधिकारी गिरफ्तार हो जाएगा। भारत में अधिकारी गिरफ्तार नहीं होते थे। घोटालों में नेता बदनाम होते थे या पकड़े जाते थे। अधिकारी बेदाग रहते थे। बोफोर्स से लेकर चारा घोटाले और संचार से लेकर आदर्श घोटाले तक किसी अधिकारी के पकड़े जाने की शायद ही मिसाल हो। कोयला घोटाले में जरूर एक आईएएस फंसे थे लेकिन अदालत ने उनको भी बरी कर दिया है। परंतु अब आए दिन किसी न किसी अधिकारी के गिरफ्तार होने की खबर आती है। अकेले झारखंड में तीन आईएएस अधिकारी अभी जेल में हैं। विनय चौबे और छवि रंजन कार्यरत आईएएस हैं और अमित प्रकाश रिटायर हैं। ये तीनों किसी न किसी मामले में जेल में बंद हैं। कुछ दिन पहले ही लंबा समय जेल में बिता कर आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल जमानत पर छूटी हैं।

उधर ओडिशा ने 10 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए आईएएस अधिकारी धीमान चकमा को गिरफ्तार किया गया है। उनको घर से 37 लाख रुपए नकद मिले। वे जेल में बंद हैं। ओडिशा में ही राजस्व सेवा के एक अधिकारी जो ईडी के डिप्टी डायरेक्टर थे उनको भी घूस लेते गिरफ्तार किया गया। छत्तीसगढ़ में आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई और रानू साहू को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को हाल ही में जमानत मिली है। लेकिन पूर्व आईएएस अभी जेल में बंद हैं उनको जमानत नहीं मिली है। इस बीच रानू साहू को आईएएस पति जयप्रकाश मौर्य को भी कोयला घोटाले में आरोपी बनाया गया है। यह सिर्फ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल राज्यों का मामला नहीं है। बिहार में भी आईएएस अधिकारी संजीव हंस जेल में बंद हैं। यह बिल्कुल नई परिघटना है। इसका एक नतीजा यह हुआ है कि नेताओं की तरह अधिकारियों की छवि भी आम लोगों की नजर में खराब हो रही है।

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