खबर है कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलने वाला है। भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार इसकी तैयारी कर रही है। अगर राज्य सरकार इसका प्रस्ताव तैयार कर रही है तो इसका अर्थ है कि इस पर सहमति बन गई है। अगर राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव आता है तो केंद्र सरकार इसकी मंजूरी दे देगी। कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल का नाम बदल कर पश्चिम बंगा किया जाएगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अंग्रेजी में भी नाम पश्चिम बंगा होगा या वेस्ट बंगा होगा। लेकिन सवाल है कि जब नाम बदलना है तो नए नाम में पश्चिम क्यों लगाए रखना है?
गौरतलब है कि ममता बनर्जी की सरकार ने भी राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था। उनका प्रस्ताव पश्चिम हटा कर सिर्फ बंगाल या बंगा नाम रखने का था। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। ममता सरकार का कहना था कि वेस्ट बंगाल नाम होने की वजह अल्फाबेटिकली राज्य बहुत पीछे चला जाता है। किसी भी कार्यक्रम में सरकारी दस्तावेजों में डब्लु लेटर के कारण राज्य का नाम सबसे बाद में आता है। उनकी सरकार ने सांस्कृतिक तर्क के साथ साथ एक व्यावहारिक तर्क भी रखा था। यह भी कहा गया था कि अब एक ही बंगाल है तो उसे पश्चिमी कहने का क्या मतलब है। लेकिन भाजपा की सरकार पश्चिमी बनाए रखना चाहती है। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी की सरकार के प्रस्ताव को कैसे शुभेंदु की सरकार आगे बढ़ा सकती है।
