पता नहीं ऐसा क्या हो रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका के साथ भारत की कोई बात ठीक नहीं बैठ रही है। कभी एक बात सही होती दिखती है तो दूसरी बात बिगड़ जाती है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने पिछले दिनों भारत के लोगों को खुश कर दिया था। वे जम्मू कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर गए तो उन्होंने श्रीनगर में कहा कि कश्मीर भारत का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाद पाकिस्तान ने खूब तीखी प्रतिक्रिया दी। लेकिन भारत में यह धारणा बनी की गोर भारत के दोस्त हैं। ध्यान रहे सर्जियो गोर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सचमुच दोस्त हैं और इस समय सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में अमेरिकी विदेश नीति वे देख रहे हैं। तभी कश्मीर पर उनका बयान बहुत अहम था। विदेश और सामरिक नीति के जानकारों ने भी इसकी तारीफ की।
लेकिन इसके तुरंत बाद सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिस पर भारत सफाई भी दे रहा है और अमेरिका को तेवर भी दिखा रहा है। एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में गोर ने कह दिया कि फ्रांस में जी 7 की बैठक में जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप मीडिया के सामने आए तो मीडिया का कोई भी सवाल इसलिए नहीं लिया गया क्योंकि भारत ने इसके लिए मना किया था। गोर ने विस्तार से इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले वे अकेले राष्ट्रपति ट्रंप के साथ थे और उस समय ट्रंप ने पूछा कि भारत की कोई खास मांग है क्या? इस पर सर्जियो गोर ने कहा कि भारत चाहता है कि साझा बयान के बाद मीडिया से कोई सवाल नहीं लिया जाए। ट्रंप ने इस बात को स्वीकार कर लिया।
गोर की इस बात पर विवाद छिड़ा है। भारत ने इस पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ‘अनप्रेडिक्टेबल’ हैं। कई देशों के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के साथ सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा किए गए अपमानजनक बरताव का भी भारत की ओर से जिक्र किया गया। सोचें, भारत की दलील कितनी लचर है! राष्ट्रपति ट्रंप ‘अनप्रेडिक्टेबल’ हैं, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है कि वे कब क्या कह देंगे इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सामने प्रेस के सवाल नहीं लिए तो फिर दूसरे प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री सवाल क्यों नहीं लेते हैं?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री, फ्रांस के राष्ट्रपति, रूस के राष्ट्रपति आदि तो ट्रंप की तरह नहीं हैं! ये लोग तो प्रेस के सामने अनाप शनाप नहीं बोलते हैं। फिर भी इनके साथ भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी मीडिया के सवाल नहीं लेते हैं। अभी नार्वे में सबने देखा कि मीडिया उनसे सवाल पूछता रह गया, वे चले गए। उन्होंने प्रधानमंत्री रहते 12 साल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। इंटरव्यू जरूर दिए है लेकिन सामूहिक रूप से मीडिया से औपचारिक संवाद नहीं किया है। इसलिए सर्जियो गोर की बात का ठीकरा अमेरिका के राष्ट्रपति पर फोड़ने का कोई अर्थ नहीं है।
