मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में करीब 40 हजार जवानों की तैनाती की गई थी। इनमें 221 टुकड़ियां अर्धसैनिक बलों की थीं यानी 23 हजार के करीब अर्धसैनिक बल तैनात किए गए और दिल्ली पुलिस के 15 हजार जवान तैनात थे। लेकिन यह सिर्फ दिल्ली का आंकड़ा है। मीडिया की अलग अलग रिपोर्ट देखें तो पता चल रहा है कि पुलिस की कार्रवाई का दायरा बहुत बड़ा था। उत्तर प्रदेश की पुलिस अलग काम कर रही थी तो हरियाणा की पुलिस भी अपना काम कर रही थी। उनकी गिनती इस तैनाती में नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार के साथ समन्वय कर रहे थे ताकि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों को रोका जाए। अगर पड़ोसी राज्यों की पुलिस की संख्या जोड़ी जाए तो आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाएगा और पुलिस की तैयारी का स्केल भी बहुत बड़ा दिखने लगेगा।
हरियाणा पुलिस ने दिल्ली के आसपास के इलाकों में गुरुग्राम और फरीदाबाद से लेकर रोहतक और सोनीपत व पानीपत में कांग्रेस पार्टी के नेताओं को घर से निकलने से रोका। जो नेता पहले छिप कर निकल गए थे वे दिल्ली पहुंच गए लेकिन शनिवार को ज्यादातर नेताओं के घरों के बाहर पुलिस बैठा दी गई। विधायक, पूर्व विधायक को छोड़िए सामान्य नेताओं के घरों के बाहर पुलिस तैनात रही। यही स्थिति नोएडा और गाजियाबाद में दिखी। जिस पैमाने पर दिल्ली में पुलिस की तैनाती की गई उसी अनुपात में दिल्ली से लगती सीमाओं पर पुलिस तैनात की गई और बैरिकेडिंग की गई। सिंघु बॉर्डर से लेकर गाजीपुर, बदरपुर और नोएडा बॉर्डर पर हजारों जवान तैनात थे। कम ट्रैफिक होने के बावजूद बैरिकेडिंग और चेकिंग के कारण कई जगह जाम लगा रहा।
