मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दूसरे कई राज्यों में भाजपा के अनेक नेता दुखी हैं। खासतौर से पार्टी के बड़े नेता, जो एक समय मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। ऐसे नेताओं की सूची लंबी है। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान से लेकर कैलाश विजयवर्गीय और नरेंद्र सिंह तोमर तक अनेक नेता हैं। चौहान केंद्र में मंत्री हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के भी केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा चल रही है। लेकिन विजयवर्गीय राज्य में सरकार में मंत्री हैं और तोमर विधानसभा अध्यक्ष। भाजपा चुनाव जीती तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना दिया। पिछले दिनों उनके परिवार के जमीन का मामला सामने आया तब भी खबर आई थी कि पार्टी की ही कुछ दुखी आत्माओं ने जमीन के सारे कागजात जुटाए हैं। लेकिन पार्टी का अनुशासन ऐसा है कि कोई खुल कर दिख भी व्यक्त नहीं कर पा रहा है।
कैलाश विजयवर्गीय पहले नेता हैं, जिन्होंने खुल कर दुख व्यक्त किया है और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इंदौर को लेकर एक लंबी चिट्ठी मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी है और चिट्ठी सार्वजनिक भी कर दी है। उन्होंने लिखा है कि खुद मोहन यादव इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री हैं, लेकिन ढाई साल से जिले को सिर्फ उपेक्षा और असहयोग मिल रहा है। विजयवर्गीय ने लिखा है कि मास्टर प्लान में देरी हो रही है, हवाईअड्डे के विस्तार के लिए जमीन नहीं मिल रही है, मेट्रोपोलिटन में नाम पीछे कर दिया गया है और जल संकट से निपटने में मदद नहीं मिल रही है। यह मामूली बात नहीं है कि पार्टी का कोई नेता अपनी ही सरकार के कामकाज को लेकर इस तरह के सवाल उठाए। यह सरकार की नाकामी दिखाने वाली चिट्ठी है। ध्यान रहे इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय ने नौकरशाही को लेकर भी एक टिप्पणी की थी। उन्होंने तंज करते हुए कहा था कि जब से भाजपा की सरकार बनी है सारे अधिकारी संघी हो गए हैं।
