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कर्नाटक भाजपा की थम नहीं रही गुटबाजी

Assam, March 19 (ANI): A BJP supporter, painted in party's flag format, waves BJP's flag as party candidate Himanta Biswa Sarma files his nomination papers ahead of Assam assembly elections, in Guwahati on Friday. (ANI Photo)

ऐसा लग रहा था कि सिद्धारमैया को हटा कर डीके शिवकुमार को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाने के बाद प्रदेश कांग्रेस में घमासान छिड़ेगा। शिवकुमार को सरकार चलाने में मुश्किल आएगी क्योंकि प्रदेश में ज्यादातर विधायक सिद्धारमैया समर्थक हैं। लेकिन उलटा हुआ है। कांग्रेस में पिछले कुछ समय से चल रही अंदरूनी कलह थम गई है, जबकि दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के भीतर की कलह खुल कर सामने आ गई है। पार्टी के अंदर घमासान छिड़ा है। नेता एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं। कर्नाटक में उलटी गंगा बह रही है। कहा जा रहा है भाजपा के कई विधायक पाला बदल कर कांग्रेस में जाने को तैयार हैं। भाजपा की सहयोगी जेडीएस के विधायक और दूसरे नेता भी इंतजार में बैठे हैं कि कब शिवकुमार उनके लिए दरवाजा खोलेंगे। इस चिंता में जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर वापस बेंगलुरू जाना चाहते हैं।

गौरतलब है कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अब दो साल से भी कम समय रह गया है। इस बीच प्रदेश भाजपा के सबसे बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा अपने दांव चल रहे हैं। उनको किसी हाल में अपने बेटे बीवाई विजयेंद्र को अगले चुनाव में सीएम चेहरे के तौर पर लड़ाना है और भाजपा के जीतने पर उनको मुख्यमंत्री बनवाना है। तभी पिछले दिनों उन्होंने बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं में से सबसे ज्यादा विवादित रहे गली जनार्दन रेड्डी को वापस पार्टी में शामिल कराया। दूसरी ओर येदियुरप्पा विरोधी खेमा विधान परिषद के चुनाव में भाजपा के 11 विधायकों के कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग का मामला उठाए हुए है। इसके लिए विजयेंद्र को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। भाजपा नेता ही मीडिया को खबर दे रहे हैं कि डीके शिवकुमार और बीवाई विजयेंद्र कारोबारी साझेदार हैं। जवाब में विजयेंद्र चाहते थे कि पार्टी विधायकों की बैठक धर्मस्थल में हो और वहां सबसे शपथ दिलाई जाए ताकि पता चले कि किसने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया।

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