कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। बुधवार, 20 मई को सरकार के तीन साल पूरे होंगे। उससे पहले सरकारी समारोह तुमकुरू में मनाया गया। इसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ साथ उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी शामिल हुए। अब सवाल है कि क्या ढाई साल के बाद सत्ता परिवर्तन होने और शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग अगले चुनाव तक स्थगित हो गई है? क्या शिवकुमार ने स्वीकार कर लिया है कि वे इस विधानसभा में मुख्यमंत्री नहीं बन सकते हैं? ध्यान रहे कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि उनकी किस्मत में जब होगा तब बनेंगे और तभी उन्होंने 2028 का संकेत भी दिया था।
असल में कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में कांग्रेस की जीत ने सिद्धारमैया की स्थिति को मजबूत किया है। ऊपर से अहिंदा वोट को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे और सिद्धारमैया एक तरह की सोच रखते हैं। खड़गे के बेटे प्रियांक और सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने पहले ही इस पर एक जैसी राय रखी थी। सो, डीके शिवकुमार अकेले पड़ गए हैं। कुछ विधायक निश्चित रूप से उनके साथ हैं लेकिन वह संख्या इतनी नहीं है, जिससे वे कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बना सकें। तभी डीके शिवकुमार चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा के नेता उम्मीद जता रहे हैं कि डीकेएस का कांग्रेस से मोहभंग होगा और वे भाजपा के साथ आएंगे। उनके कई करीबी भी कह रहे हैं कि जैसे भाजपा ने हिमंता, शुभेंदु औऱ सम्राट को सीएम बनाया है वैसे ही शिवकुमार को भी बना सकती है। लेकिन यह थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि भाजपा लिंगायत वोट नहीं छोड़ सकती है।
