केरल में कांग्रेस की सरकार उन तमाम दुविधाओं से गुजर रही है, जिनका सामना पहले वाली कम्युनिस्ट सरकार को करना पड़ा था। पीएम श्री योजना को लागू करने के मामले में भी कांग्रेस पहले तैयार हो गई थी लेकिन बाद में उसने कदम पीछे खींच लिए। स्कूलों के लिए लाई गई केंद्र सरकार की पीएमश्री योजना के कारण लेफ्ट सरकार भी निशाने पर आई थी। अब वंदे मातरम् के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् का प्रोटोकॉल बदला है और राष्ट्र गान की तरह हर सरकारी कार्यक्रम में गाना अनिवार्य किया है।
इतना ही नहीं सरकार ने वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाने की अनिवार्यता बनाई है। इसके लिए तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। केरल सरकार दुविधा में थी। क्योंकि बड़ी आबादी मुस्लिम और ईसाई है। खास कर मुस्लिम इसका विरोध करते हैं क्योंकि बाद के अंतरे में हिंदू देवी, देवताओं का नाम आता है। अब केरल सरकार ने साफ कर दिया है कि केरल में सिर्फ दो ही अंतरे गाए जाएंगे। यानी पूरा वंदे मातरम् नहीं गाया जाएगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन और कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने कहा है कि केरल में पूरा वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा। पीएमश्री के बाद यह दूसरा मामला है, जिसमें केरल सरकार पीछे हटी है।
