बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। चार सीटें स्नात्तक मतदाताओं वाली हैं और चार शिक्षक मतदाताओं वाली। इन आठ में से पटना स्नात्तक सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है। इस सीट पर तीन बार चुनाव जीते नीरज कुमार एक बार फिर जनता दल यू के उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे हैं। इस बार भी उनके जीतने में कोई संशय नहीं था। लेकिन जदयू के ही मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अनंत सिंह ने पुरानी दुश्मनी के हवाले नीरज कुमार को हराने का संकल्प किया। नीरज को हराने के लिए जदयू विधायक अनंत सिंह जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के लिए प्रचार कर रहे हैं।
पहली नजर में यह अनंत सिंह और नीरज कुमार का निजी विवाद दिख रहा है। लेकिन असल में यह जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का पावर गेम है। नीतीश कुमार की मानसिक अवस्था बिगड़ने और संजय झा के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी के अंदर ललन सिंह की स्थिति कमजोर हुई है। पिछले दिनों विधानमंडल दल की एक बैठक में उनको नहीं बुलाया गया था, जहां उनके समर्थक विधायकों ने खूब हंगामा किया। पटना स्नात्तक सीट के बहाने ललन सिंह अपनी ऑथोरिटी स्थापित करना चाहते हैं। तभी उन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार का साथ नहीं देने का फैसला किया है। अगर अनंत सिंह मेहनत करके नीरज कुमार को हरा देते हैं तो ललन सिंह यह मैसेज देने में कामयाब होंगे कि मौजूदा नेतृत्व में पार्टी को चलाने या बचाने की क्षमता नहीं है। इसलिए यह चुनाव नीरज कुमार या अनुज सिंह और अनंत सिंह का नहीं है, बल्कि पार्टी नेतृत्व बनाम ललन सिंह का हो गया है।
