मुंबई में अगर शिव सैनिक मेयर बने तो वह उद्धव ठाकरे की पार्टी का हो वरना न हो, यह उद्धव ने तय किया है। इसलिए वे एकनाथ शिंदे की पार्टी के किसी व्यक्ति को मुंबई का मेयर बनने से रोकने के लिए कुछ भी करेंगे। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे ने बाला साहेब ठाकरे की सौवीं जयंती का भावनात्मक कार्ड खेला है। उन्होंने भाजपा के आगे यह प्रस्ताव रखा है कि बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि देने के लिए शिव सेना के किसी पार्षद को एक साल के लिए मेयर बना दिया जाए और उसके बाद चार साल भाजपा अपना मेयर बनाए। शिंदे यह भी समझा रहे हैं कि इससे उद्धव ठाकरे को झटका लगेगा और उनकी पार्टी टूट भी सकती है। उनके पार्षद शिंदे की पार्टी का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि भाजपा इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं है। उसका कहना है कि यह ऐतिहासिक जनादेश है और वह अपना मेयर बनाएगी। इसे लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और एकनाथ शिंदे की मुलाकात भी हुई है, जिसमें भाजपा की ओर से दो टूक अंदाज में शिंदे को कह दिया गया है कि भाजपा अपना मेयर बनाएगी। अगर शिंदे मुंबई में अड़ंगा डालेंगे तो कल्याण डोंबिवली और उल्लासनगर में भाजपा भी अड़ंगा डाल सकती है।
जानकार सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे भी चाहते हैं कि किसी तरह से उनकी पार्टी का मेयर बने, जिसकी संभावना बहुत कम है और नहीं तो भाजपा का ही मेयर बने। बताया जा रहा है कि इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से संपर्क भी किया हुआ है। कहा जा रहा है कि उन्होंने भाजपा को परोक्ष समर्थन का वादा किया है। अगर एकनाथ शिंदे अड़े रहते हैं तो मेयर के चुनाव के समय उद्धव ठाकरे की पार्टी के पार्षद चुनाव का बहिष्कार कर देंगे। किसी शिव सैनिक को मेयर नहीं बनाए जाने की शिकायत करते हुए अगर उद्धव की पार्टी बहिष्कार कर देती है तो बीएमसी की संख्या 162 रह जाएगी, जिसमें बहुमत का आंकड़ा घट कर 82 हो जाएगा। भाजपा के पास अपने 89 पार्षद हैं। इसलिए उसको शिंदे के 29 पार्षदों की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। उद्धव के इस दांव का इस्तेमाल भाजपा शिंदे पर दबाव डालने के लिए कर रही है।
