अभी तक इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि शरद पवार की पार्टी कैसे और क्यों टूटी थी? शरद पवार जैसा बड़ा क्षत्रप नेता इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि अजित पावर पार्टी तोड़ दें और वे कुछ नहीं कर सकें? तभी कई लोग आज भी कहते हैं कि वह शरद पवार का ही गेमप्लान था। अजित पवार अलग हो गए। पार्टी लेकर भाजपा के साथ चले गए। इसका लाभ यह हुआ है कि उनका परिवार भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हो गया। कई मामलों में क्लीनचिट मिल गई और कई मामलों में क्लोजर रिपोर्ट भी लग गई। यह भी कहा जाता है कि ये लक्ष्य पूरा होने के बाद अजित पवार वापस चाचा की पार्टी में विलय के लिए तैयार हो गए थे। लेकिन इसी बीच एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई।
अगर ये बात सही है तो फिर सवाल है कि सुनेत्रा पवार क्यों अपने दिवंगत पति की इच्छा का सम्मान नहीं कर रही हैं? वे क्यों नहीं पार्टी का विलय शरद पवार की पार्टी से कर रही हैं? ऐसा लग रहा है कि अब उनकी राजनीति बेटे पार्थ पवार को मराठा नेता बनाने की है। इस काम में सुनेत्रा पवार के घर के लोग यानी उनके भाई और उस परिवार के लोग उनकी मदद कर रहे हैं। वह भी बड़ा राजनीतिक परिवार है। इस बात से प्रफुल्ल पटेल व अन्य नेता छटपटा रहे हैं। प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रिफ इसी बेचैनी में अमित शाह से मिले हैं। ये सब पिछड़े, दलित और अन्य समुदाय के हैं। इन्हें मराठा राजनीति में जगह नहीं मिल रही है। इस नए घटनाक्रम से महाराष्ट्र की राजनीति दिलचस्प हो गई है।
