भारतीय जनता पार्टी की चाहे केंद्र की सरकार हो या उसकी राज्यों की सरकारें हों, उनको अपने फायदे के लिए किसी भी चीज के उपयोग या दुरुपयोग में कोई हिचक नहीं होती है। चाहे कानून हो, एजेंसियां हों, संस्थाएं हों या सरकारी संपत्ति हो। ताजा मामला गुजरात का है, जहां वडोदरा नगर निगम ने क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस से टूट कर अलग हुए सांसद यूसुफ पठान के प्रति कमाल की दरियादिली दिखाई है असल में यूसुफ पठान और उनके भाई इरफान पठान का जहां घर है वहां 978 वर्ग मीटर का एक भूखंड उनके पास था, जिसके बारे में वडोदरा नगर निगम का कहना था कि पठान परिवार ने उस पर अवैध कब्जा कर रखा है। यूसुफ पठान जब 2024 में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से लड़े और जीत गए तब नगर निगम ने उनको नोटिस जारी करके यह जमीन खाली करने को कहा।
लेकिन अब वडोदरा नगर निगम ने न सिर्फ नोटिस वापस ले लिया है, बल्कि जमीन भी उनको दे दी है। गौरतलब है कि दो महीने पहले ही यूसुफ पठान तृणमूल कांग्रेस से अलग हो गए और भाजपा की प्रॉक्सी पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गए। उसके बाद उनकी सारी समस्याएं दूर हो गईं। वडोदरा नगर निगम ने 978 वर्ग मीटर जमीन में से पांच सौ वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को दान में दे दी है। सोचें, इस देश के किसी नगर निगम में लोगों को संपत्ति कर से लेकर सफाई कर तक के हजार, दो हजार रुपए माफ कराने में कितनी मशक्कत करनी पड़ती है। लेकिन पांच सौ वर्ग मीटर जमीन दान कर दी गई और बची हुई 478 वर्ग मीटर जमीन भी कौड़ियों के मोल यूसुफ पठान को दे दी गई। इसको माले मुफ्त, दिले बेरहम कहते हैं। जनता की जमीन है लेकिन भाजपा के राजनीतिक फायदे के लिए नगर निगम द्वारा खुले दिन से बांटी जा रही है।
