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मिलन प्रधान तो शुभेंदु के साथ ही आंदोलन में थे

Howrah, Aug 16 (ANI): West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari addresses a press conference at Nabanna (State Secretariat), in Howrah on Sunday. (ANI Photo)

पश्चिम बंगाल में बहुत दिलचस्प घटनाक्रम चल रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपनी पारंपरिक विधानसभा सीट और अपने परिवार का गढ़ माने जाने वाले नंदीग्राम में उपचुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाया है। तभी ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे को चुनाव मैदान से हटाया गया। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख बीतने के बाद शुक्रवार, 18 सितंबर को खुद मुख्यमंत्री ने संचिता प्रधान से मुलाकात की और उसके बाद उन्होंने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान किया। उसके बाद ममता बनर्जी के पास कोई विकल्प नहीं बचा तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया कि वे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करेंगी। लेकिन उन्होंने जैसे ही कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया उसके थोड़ी देर बाद ही बंगाल पुलिस ने मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया।

सोचें, मुख्य विपक्ष को इस तरह से मैदान से हटाने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? यह भी हैरान करने वाली बात है कि मिलन प्रधान को 2007 में दर्ज हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। लगभग 20 साल के बाद अचानक पुलिस को ध्यान आया है कि एक वारंट लंबित है और प्रधान को गिरफ्तार करना चाहिए। इससे पहले प्रधान ने नामांकन किया तो निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना हलफनामा भी पेश किया, जिसमें इस मुकदमे का जिक्र था। लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं की गई। तब मिलन प्रधान को कुछ नहीं समझा जा रहा था। वैसे भी नंदीग्राम में कांग्रेस को आधा फीसदी वोट आया था। लेकिन जब ममता ने उनको समर्थन दिया तब अचानक वे गंभीर उम्मीदवार हो गए। फिर पुराना मामला निकाला गया। मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई कि 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े जिस मामले में उनको गिरफ्तार किया गया उस आंदोलन का नेतृत्व तो खुद शुभेंदु अधिकारी कर रहे थे। वे उस समय तृणमूल कांग्रेस में थे। लेकिन अब वे मुख्यमंत्री हैं और जो चाहें सो कर सकते हैं।

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