भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में बड़ा बदलाव हुआ है। 65 लोगों की टीम में सिर्फ 14 लोग रिपीट किए गए हैं और 51 नए लोगों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कई पुराने लोगों की वापसी हुई है। तभी कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार में भी इसी तरह का बदलाव होगा। इसी तरह के बदलाव का मतलब है कि कुछ पुराने लोगों की वापसी हो सकती है और बड़ी संख्या में मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। एक जानकार सूत्र का कहना है कि कम से कम 30 मंत्रियों की छुट्टी होगी या उनके विभाग बदले जाएंगे। यह भी कहा जा रहा है कि जो चर्चित चेहरे नितिन नबीन की टीम में जगह नहीं बना पाए उनको सरकार में मौका मिल सकता है।
नितिन नबीन की टीम बनने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पीयूष गोयल मंत्री बने रहेंगे य कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने के लिए मंत्री पद छोड़ेंगे? जानकार सूत्रों का कहना है कि उनके मंत्री बने रहने की संभावना ज्यादा है। वे कुछ समय तक दोनों पदों की जिम्मेदारी निभा सकते हैं। इसी तरह से एक चर्चा यह है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खाली हुआ शिक्षा मंत्रालय किसे मिलेगा? अभी प्रभारी के तौर पर प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे हैं। लेकिन इसके अलावा भी उनके पास दो मंत्रालय हैं। हो सकता है कि उनको पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री बनाया जाए। लेकिन एक चर्चा यह भी है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्री बनाया जा सकता है।
यह तभी होगा जब प्रधानमंत्री तय करेंगे कि शीर्ष पांच मंत्रालयों में बदलाव करना है या मंत्रीमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की संरचना बदलनी है। कहा जा रहा है कि अगर वित्त छोड़ कर निर्मला शिक्षा में जाती हैं तो अश्विनी वैष्णव की लॉटरी लग सकती है। वे वित्त मंत्री हो सकते हैं। अगर वे वित्त में जाते हैं तो एक साथ तीन मंत्रालय खाली होंगे। वे रेल, सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना व प्रसारण मंत्रालय तीनों का भार उठा रहे हैं। हालांकि किसी जाने माने अर्थशास्त्री को वित्त मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी हो रही है। अगर ऐसा है को सीसीएस के साथ साथ सीसीई में भी बदलाव होगा।
बदलाव अब एकदम आवश्यक इसलिए दिख रहा है क्योंकि तीन मंत्रियों का इस्तीफा हो चुका है। जॉर्ज कुरियन, रवनीत सिंह बिट्टू और धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है। इनके अलावा तीन मंत्री पीयूष गोयल, हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मल्होत्रा दिल्ली के तो चौधरी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष हो गए हैं। गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा सरकार के दो साल से ज्यादा हो गए हैं और अगले साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस लिहाज से भी बदलाव जरूरी है। मोदी ने पहले की दोनों सरकारों में पांच साल में दो बार फेरबदल किया था। तीसरी सरकार में अभी तक फेरबदल नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि नितिन नबीन की टीम से बाहर हुए और या उसमें जगह नहीं बना पाए कई नेताओं को सरकार में जगह मिल सकती है। सुधांशु त्रिवेदी से लेकर अनुराग ठाकुर, राजीव प्रताप रूड़ी और तेजस्वी सूर्या से लेकर बांसुरी स्वराज तक अनेक नेता कतार में बताए जा रहे हैं। सरकार में नई पीढ़ी का नेतृत्व बढ़ना तय माना जा रहा है।
