ऐसा कांग्रेस पार्टी के ही नेता कह रहे हैं। उनका कहना है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नियुक्त चुनाव अधिकारी अरविंद शर्मा ने कांग्रेस की इज्जत बचा ली। क्योंकि अगर वे मीनाक्षी नटराजन का नामांकन नहीं खारिज करते तो मीनाक्षी चुनाव में हारतीं। वह कांग्रेस के लिए ज्यादा शर्मिंदा होने की बात होती कि उसके 62 विधायकों में से एक दर्जन से ज्यादा विधायक क्रॉस वोटिंग कर देते। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद सभी 62 विधायक एकजुट दिखे लेकिन जानकारों का कहना है कि उससे पहले सब एकजुट नहीं थे और टूट का खतरा था इसलिए विधायकों को बेंगलुरू ले जाया जा रहा था। उनका जहाज रनवे पर से लौटा था।
सोचें, अगर विधायक बेंगलुरू में रखे जाते और वोटिंग के दिन उनको लाया जाता और फिर भी मीनाक्षी नटराजन चुनाव हार जातीं तो क्या होता? फिर तो पार्टी में एक और टूट होती। वह टूट टल गई है। उलटे कांग्रेस को वोट चोरी के बाद सीट चोरी का एक मुद्दा मिल गया है। इस मसले पर कांग्रेस चाहे तो आंदोलन कर सकती है। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की रिट याचिका खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव याचिका के जरिए इसका समाधान हो सकता है। लेकिन पता नहीं कांग्रेस चुनाव याचिका दायर करेगी या नहीं।
