भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को लोकसभा की एक एक सीट की चिंता है। इसलिए कई सांसदों के ऊपर अनुशानहीनता के आरोप लगने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। दूसरी बात यह है कि भाजपा की इस चिंता को लेकर चुनाव आयोग कितना संवेदनशील है वह भी दिखाई देता है। सोचें, पिछले दो साल से पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट खाली है। इस साल मई में खाली हुई असम की नगांव सीट पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव करा लिया है लेकिन बशीरहाट सीट खाली रखी गई है। इसका एकमात्र कारण यह है कि मुस्लिम बहुल इस सीट पर उपचुनाव हुआ तो भाजपा नहीं जीत पाएगी। कोई विपक्षी पार्टी ही जीतेगी। इसलिए आयोग चुनाव ही नहीं करा रहा है। इसके बावजूद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले कठघरे में खड़ा किए जा रहे हैं!
बहरहाल, बिहार में जनता दल यू के कई सांसद बागी हो गए हैं। कई तो नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते ही पार्टी विरोधी काम में लग गए थे। बांका के सांसद गिरधारी यादव ने अपने बेटे को राजद की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। संसद में सरकार की लाइन से अलग बोलते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी। लेकिन फिर रोक दिया गया। ऐसे ही भागलपुर के सासंद अजय मंडल अपने प्रतिद्वंद्वी शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के जदयू में आने और राज्य सरकार में मंत्री बन जाने से नाराज हैं और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। तीसरी सांसद लवली आनंद के पति आनंद मोहन लगातार पार्टी के खिलाफ लाइन पर चल रहे हैं। मधेपुरा के सांसद दिनेश चंद्र यादव भी पार्टी से उलट कामकाज कर रहे हैं। लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्योंकि इस समय एनडीए एक भी सांसद गंवाने की जोखिम नहीं ले सकता है।
