Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

बिहार में एनडीए पार्टियों की अपनी अपनी राजनीति

बिहार में विधान परिषद की नौ सीटों के लिए चुनाव हुए हैं और एक सीट पर उपचुनाव हुआ। इन 10 सीटों के चुनाव में एनडीए की सभी सहयोगी पार्टियों ने अपने अपने हिसाब से राजनीति की। इसका अर्थ है कि एनडीए के रूप में उम्मीदवारों का चयन नहीं हुआ। ऐसा नहीं हुआ कि पार्टियों ने आपस में बात करके सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरण का ध्यान रखते हुए उम्मीदवार चुने। सबने अपनी राजनीति और वोट बैंक के हिसाब से उम्मीदवार दिए। अच्छी बात यह रही कि पैसे से राज्यसभा और विधान परिषद की सीट बेचने के आरोप इस बार नहीं लगे क्योंकि सभी पार्टियों ने राजनीतिक लोगों को ही उम्मीदवार बनाया। राजद के सुनील सिंह को लेकर ऐसी चर्चा जरूर हुई लेकिन वे छह साल से एमएलसी हैं और राजद के कोषाध्यक्ष हैं साथ ही जातीय समीकऱण में फिट हैं इसलिए यह कोई विवाद की बात नहीं है।

सबसे दिलचस्प एनडीए की सूची रही। नीतीश कुमार को तीन, भाजपा को चार और लोजपा को एक सीट मिली थी। इसके अलावा नीतीश के इस्तीफा से खाली हुई सीट उनकी पार्टी को मिली। उन्होंने उस सीट से धानुक जाति के ललन प्रसाद को भेजा। सोचें, पहले ही सरकार में उन्होंने दो धानुक मंत्री बनाए हैं। यानी वे कोईरी, कुर्मी, धानुक का अपना समीकऱण नहीं छोड़ रहे हैं। यह भी दिलचस्प रहा कि जनता दल ने एक कुम्हार उम्मीदवार दिया तो भाजपा ने भी कुम्हार उम्मीदवार दिया। सोचें, इस अति पिछड़ी जाति की आबादी बहुत कम है लेकिन एनडीए के आठ में से दो उम्मीदवार इस जाति के हैं। उधर चिराग पासवान ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा। एनडीए में रह कर मुस्लिम को विधान परिषद में भेजने का फैसला मामूली नहीं था। लेकिन चिराग पासवान भी अपने पिता वाली राजनीति जारी रखे हुए हैं।

Exit mobile version