दिल्ली की आबादी दो करोड़ के करीब है और डेढ़ करोड़ मतदाता हैं। अगर सिर्फ मतदाताओं की संख्या के लिहाज से देखें तो 70 लाख के आसपास वयस्क महिलाएं हैं, जो मतदाता हैं। लेकिन दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने महिला सम्मान के नाम पर जिस लक्ष्मी योजना की शुरुआत की है उसमें सिर्फ 17 लाख महिलाओं को ही हर महीने ढाई हजार रुपए होंगे। पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि दिल्ली की कम से कम 35 से 40 लाख महिलाओं को महिला सम्मान योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन डेढ़ साल का समय लगा कर दिल्ली सरकार ने ऐसी छंटनी की है और ऐसे मानक तय किए हैं सिर्फ 17 लाख महिलाएं उसकी कसौटी पर लाभ लेने लायक दिखी हैं।
सोचें, 2025 की जनवरी में चुनाव प्रचार करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि दिल्ली की महिलाओं को ढाई हजार रुपए मिलेंगे। उन्होंने समय सीमा भी दी थी और कहा था कि आठ मार्च को महिला दिवस के दिन महिलाओं को पैसे मिलेंगे। लेकिन 2025 और 2026 दोनों का महिला दिवस निकल गया और महिलाओं को पैसे नहीं मिले। अब जाकर इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ है। इसमें महिलाओं को छांटने के कई नए पैमाने जोड़ दिए गए हैं। आय, रोजगार, सरकारी नौकरी आदि के पैमाने तो हैं ही इसमें एक पैमाना यह भी है कि महिला घर की सबसे बड़ी सदस्य होनी चाहिए। इन तमाम पैमानों पर कट छंट के सिर्फ 17 लाख नाम बचे हैं। इसी तरह के फॉर्मूले पर महाराष्ट्र सरकार ने 90 लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम लाभार्थियों में से काट दिया है। ऐसा लग रहा है कि सरकारों ने इस तरह का रास्ता निकाला है कि योजना भी चलती रहे और ज्यादा बोझ भी नहीं पड़े।
