कांग्रेस ने पंजाब में विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को कांग्रेस ने साढ़े चार साल तक अध्यक्ष बना कर रखा और चुनाव से ऐन पहले हटा दिया। उनकी जगह पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान व कोच रहे परगट सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है। परगट सिंह ने अकाली दल से अपनी राजनीति शुरू की थी और 2012 में पहली बार विधायक बने थे। बाद में वे नवजोत सिंह सिद्धू के बनाए एक संगठन से जुड़े और 2017 में कांग्रेस में आए। परगट सिंह को आम सहमति का अध्यक्ष माना जा रहा है।
परंतु असल में वे मजबूरी का नाम हैं। उनके अलावा बाकी जो दावेदार थे उन पर सहमति नहीं बन रही थी। भले राजा व़डिंग ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया लेकिन यह सुनिश्चित किया कि चरणजीत सिंह चन्नी अध्यक्ष न बन पाएं। कांग्रेस की केंद्रीय टीम के कुछ नेता विजय इंदर सिंगला को अध्यक्ष बनाना चाहते थे। उनके नाम पर चन्नी को परेशानी नहीं थी लेकिन बाकी सभी जाट सिख नेताओं ने मिल कर सुनिश्चित किया कि वे अध्यक्ष न बनें। ऐसे ही वड़िंग, चन्नी और बाजवा ने मिल कर यह सुनिश्चित किया कि सुखजिंदर सिंह रंधावा अध्यक्ष न बनें। यह भी दबाव रहा कि मालवा से किसी को अध्यक्ष न बनाया जाए। सो, अंत में परगट सिंह के नाम का फैसला हुआ, जो जालंधर से आते हैं यानी दोआबा के नेता हैं। हरियाणा अलग होने के बाद दोआबा का कोई नेता पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं बना। चन्नी भले जालंधर के सांसद हैं लेकिन वे भी मूल रूप से मालवा क्षेत्र के रहने वाले हैं।
