नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन की बात करें तो उसे दो हिस्सों में बांट कर देखना होगा। एक हिस्सा आरएसएस के स्वंयसेवक और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता व नेता का है, जबकि दूसरा संवैधानिक पद पर रह कर गुजरात और देश की सेवा का है। निःसंदेह उनके सांगठनिक और राजनीतिक कार्यों का दायरा बहुत विशाल है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़ी दो अहम तिथियां अगले कुछ दिनों में आने वाली हैं। 17 सितंबर को उनका जन्मदिन है और उसके अगले महीने सात अक्टूबर को सार्वजनिक जीवन में उनकी योगदान यानी संवैधानिक पद पर रह कर राज्य और देश की सेवा करने के 25 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर उनकी उपलब्धियों का मूल्यांकन आवश्यक है। अगर उनके सार्वजनिक जीवन की बात करें तो उसे दो हिस्सों में बांट कर देखना होगा। एक हिस्सा आरएसएस के स्वंयसेवक और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता व नेता का है, जबकि दूसरा संवैधानिक पद पर रह कर गुजरात और देश की सेवा का है।
निःसंदेह उनके सांगठनिक और राजनीतिक कार्यों का दायरा बहुत विशाल है। देश उससे परिचित है। भाजपा के उत्थान में सबसे ज्यादा योगदान करने वाले दो अभियानों में उनकी महती भूमिका रही। सोमनाथ से अयोध्या तक लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के वे कर्ताधर्ता थे तो डॉ. मुरली मनोहर जोशी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के अभियान की कमान भी उनके हाथ में थी। गुजरात का 1995 का चुनाव उनकी सांगठनिक क्षमता और राजनीतिक कौशल का श्रेष्ठ प्रदर्शन था।
संवैधानिक पद संभालने के बाद दुनिया ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रशासनिक कौशल और उनकी विकास दृष्टि को देखा। गुजरात में उन्होंने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी। गुजरात में आर्थिक विकास की रफ्तार पहले से ठीक ठाक थी। लेकिन वाइब्रेंट गुजरात के आयोजन से गुजरात में निवेश का रास्ता और प्रशस्त हुआ, जिससे विकास यात्रा की गति तेज हुई और एक ऐसा मॉडल विकसित हुआ, जिसे पूरे देश में अलग अलग तरीके से अपनाने का प्रयास हुआ है। इसके अलावा गुजरात में दूसरी कई संरचनात्मक समस्याएं थीं, जिनकी पहले अनदेखी हो रही थी परंतु मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने उसे चुनौती की तरह लिया और उसका समाधान किया। मिसाल के तौर पर गुजरात का एक बड़ा हिस्सा सूखे से ग्रस्त था। गर्मियों में लोगों को पीने का पानी नहीं मिलता था।
नर्मदा का पानी गुजरात के सूखे इलाके में पहुंचाने का प्रयास दशकों से हो रहा था लेकिन कई कारणों से कामयाबी नहीं मिल रही थी। नरेंद्र मोदी ने उस अभियान को सफल बनाया और गुजरात के तमाम सूखे इलाकों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की। साबरमती के पुनरूद्धार के मामले को भी इससे जोड़ सकते हैं। उन्होंने गुजरात को विरासत में मिली समस्याओं से छुटकारा दिलाया और सांस्कृतिक श्रेष्ठता सुनिश्चित की। पिछले ही दिनों सोमनाथ मंदिर के पुनरूद्धार के 75 साल पूरे हुए और देश ने इस अवसर पर हिंदू धर्म की श्रेष्ठता और उसके एक गौरवशाली प्रतीक की भव्यता देखी।
गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते नरेंद्र मोदी ने जिस दूरदर्शिता, समावेशी विकास और भारत की धार्मिक व सांस्कृतिक श्रेष्ठता की भावना के साथ काम किया उससे उनके राष्ट्रीय राजनीति में आने और देश का प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। 2014 में जब वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर चुनाव लड़े तो ऐसा लगा, जैसे देश इस क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। भारत के लोगों ने बांहें फैला कर उनका स्वागत किया और पहली बार उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। सिर्फ भाजपा की नहीं, बल्कि तीन दशक के बाद किसी भी पार्टी की पहली पूर्ण बहुमत वाली सरकार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में बनी।
उसके बाद लगातार भारतीय जनता पार्टी लोकसभा का चुनाव जीत रही है और एक के बाद एक राज्यों में भाजपा की भगवा लहरा पहुंच रही है। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने पिछले ही दिनों 12 साल पूरे किए हैं। वे सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं। परंतु सिर्फ प्रधानमंत्री के रूप में उनके कामकाज के विश्लेषण से पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी। उनके प्रधानमंत्री रहते भारतीय जनता पार्टी के संगठन का भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
करीब 20 राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकार है। भारत जैसी बहुदलीय शासन प्रणाली में यह उपलब्धि मामूली नहीं है। यह दिखाता है कि देश के लोगों को उनके नेतृत्व पर विश्वास है और वे अपने और देश के भविष्य के लिए मोदी और भाजपा को आवश्यक मान रहे हैं। संवैधानिक मूल्यों को बचाए रखते हुए नरेंद्र मोदी ने विशाल राजनीतिक उपलब्धि हासिल की है।
तभी जब भारतीय जनता पार्टी ने तय किया कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे करने के मौके पर पूरे एक महीने तक सेवा संकल्प अभियान चलेगा तो यह सिर्फ भाजपा का अभियान नहीं रहा, बल्कि पूरे देश का अभियान बन गया। देश के लोग स्वंयस्फूर्त तरीके से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं। ध्यान रहे पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने जितने भी अभियान शुरू किए सब अपने आप घर घर का अभियान बने। हर घर तिरंगा अभियान इसकी मिसाल है। पिछले कई वर्षों से देश के लोग अपने आप घरों पर तिरंगा लगाते हैं और देश प्रेम की भावना को प्रकट करते हैं। वैसे ही सेवा संकल्प अभियान भी घर घर का अभियान बनेगा।
यह महज संयोग है कि ये दोनों तिथियां ऐसे समय आ रही हैं, जब सारी दुनिया की नजरें भारत पर थीं। भारत ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है और 12 व 13 सितंबर के यह सम्मेलन विश्व व्यवस्था को व्यापक रूप से प्रभावित करने वाली है। सारी दुनिया ने देखा है कि कैसे इस सम्मेलन में भारत ने विरोधी विचारों और विरोधी हितों वाले देशों को एक मंच पर बैठाया और एक बहुध्रुवीय विश्व के लिए आधारभूमि तैयार की। ब्रिक्स सम्मेलन से इतर भारत ने तमाम देशों के साथ दोपक्षीय वार्ता भी की, जिसमें रूस और चीन के साथ हुई वार्ता सबसे अहम है। भारत के सीमा विवाद, सामरिक आवश्यकताओं और व्यापार की बढ़ोतरी के लिए ये दोपक्षीय वार्ताएं अहम थीं।
कहने की आवश्यकता नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व स्तर पर वह स्थान बनाया है, जहां से वह कुछ भी कहता है तो दुनिया उसे गौर से सुनती है और स्वीकार भी करती है। भारत बिना अमेरिका या यूरोप का विरोधी बने एक नई विश्व व्यवस्था बनवा रहा है। डॉलर का वर्चस्व खत्म करने के विवाद में पड़े बगैर ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन के लिए साझा मुद्रा की वार्ता को आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने का संकल्प किया है तो उस संकल्प को पूरा करने के लिए जो भी प्रयास हो सकते हैं वह किया जा रहा है। वे भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहे हैं और मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। भारत को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में उनके कार्यकाल में व्यापक रूप से काम हुआ।
जिस तरह से गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने विरासत में मिली समस्याओं को खत्म किया उसी तरह प्रधानमंत्री के रूप में भी उन्होंने काम किया। अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए विरासत में मिली समस्या थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने समाप्त किया। पूर्वोत्तर के राज्यों की सीमा से जुड़ी समस्याओं को समाप्त करने के लिए ठोस समझौते कराए। अयोध्या में राममंदिर के निर्माण का कार्य शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ और हिंदुओं की पांच सौ साल की प्रतीक्षा समाप्त हुई।
पड़ोस के देशों से धार्मिक प्रताड़ना झेल कर भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने के लिए देश के नागरिकता कानून में संशोधन भी एक बहुत बड़ा काम था तो मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और अधिकार की सुरक्षा के लिए तीन तलाक को समाप्त कर उसे अपराध बनाने का कानून भी एक बड़ी उपलब्धि है। भारत में इन चीजों के बारे में कभी सोचा भी नहीं जा सकता था। वंदे मातरम का सम्मान बहाल करने का कानून भी भारत के सांस्कृतिक उत्थान की दिशा में एक ठोस कदम है।
जिस तरह से सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं को सुलझाया गया वैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक व सामरिक मसलों पर भी भारत की प्रगति सुनिश्चित की। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है और जिस समय दुनिया दो दो युद्धों के कारण आपूर्ति शृंखला की बाधा झेल रही उस समय भारत 7.8 फीसदी की विकास दर हासिल कर रहा है। ऐसे ही सामरिक रूप से भारत कितना सक्षम है यह ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने देखा। भारत आज कूटनीति के मंच पर एक बड़ी ताकत है तो सामरिक और आर्थिक मोर्चे पर भारत ने अपने को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है। ऐसी अभूतपूर्व उपलब्धियों का उत्सव प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में उनके 25 साल पूरे करने के अवसर पर मनाया जा रहा है। (लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)
