दिल्ली की पुलिस कई कमाल के काम करती है। अभी जो नया कमाल उसने किया है वह ये है कि उसने दिल्ली के लोगों से अपील की है कि वे 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए नहीं जाएं। कहा जा रहा है कि कानून व्यवस्था की चिंता में दिल्ली पुलिस ने यह अपील की है। यह भी कहा जा रहा है कि जंतर मंतर पर बीएनएस की धारा 163, जिसे धारा 144 कहा जाता था, वह लगी हुई है। इसका अर्थ है कि पांच से ज्यादा लोगों के एक जगह इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है। इसलिए पुलिस ने लोगों से अपील की है। लेकिन सवाल है कि क्या किसी लोकतांत्रिक प्रदर्शन में शामिल होने से लोगों को रोकने की ऐसी अपील पुलिस कर सकती है?
असल में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी और लेफ्ट पार्टियों के छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। बुधवार, सात अक्टूबर को सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें देश भर के लोगों से 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया है। जैसे ही सीजेपी और लेफ्ट नेताओं की अपील आई वैसे ही दिल्ली पुलिस सक्रिय हो गई और उसने लोगों से प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर नहीं जाने की अपील कर दी। दिल्ली पुलिस पहले से सवालों के घेरे में है। उसकी इस अपील के बाद नई बहस छिड़ गई है।
