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पंजाब में नई भाजपा पुरानी कांग्रेस है

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वैसे तो पूरे देश में ही ऐसा हो रहा है कि आम मतदाताओं के लिए उम्मीदवरों की पहचान मुश्किल हो रही है। पिछले चुनाव तक लोगों ने जिसको कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर वोट दिया था वह भाजपा की टिकट से लड़ रहा है। बहुजन समाज पार्टी वाला समाजवादी पार्टी की टिकट से लड़ रहा है। आम आदमी पार्टी वाला कांग्रेस या भाजपा का उम्मीदवार बना हुआ। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कंफ्यूजन है, जहां अचानक दो नई पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं। ऐसा ही एक राज्य पंजाब भी है, जहां मतदाताओं को उम्मीदवार और उसकी पार्टी की पहचान को लेकर कंफ्यूजन बना है। पंजाब में पहली बार भाजपा अकेले चुनाव लड़ रही है और वह स्पष्ट रूप से कांग्रेस की तरह दिख रही है क्योंकि उसके ज्यादातर उम्मीदवार कांग्रेस के नेता हैं।

पंजाब में भाजपा को चुनाव लड़ा रहे प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ हाल के दिनों तक कांग्रेस में थे और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। भाजपा ने पटियाला सीट से कांग्रेस की निवर्तमान सांसद परनीत कौर को टिकट दिया है। वे दो बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे कैप्टेन अमरिंदर सिंह की पत्नी हैं। भादपा ने लुधियाना सीट से कांग्रेस के निवर्तमान सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को टिकट दिया है। वे दो बार से कांग्रेस के सांसद हैं और उनके दादा बेअंत सिंह कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। भाजपा ने फिरोजपुर सीट से राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को उम्मीदवार बनाया है, जो 2022 के विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस के विधायक थे। वे लगातार चार बार कांग्रेस के विधायक रहे और कैप्टेन की सरकार में मंत्री भी रहे। संगरूर से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे अरविंद खन्ना प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और कोषाध्यक्ष रहे हैं। फतेहगढ़ साहिब सीट से भाजपा के उम्मीदवार गेज्जाराम वाल्मिकी भी कांग्रेस में थे और इस साल फरवरी में ही भाजपा में शामिल हुए हैं। इसी तरह भाजपा ने जालंधर सीट से सुशील कुमार रिंकू को टिकट दिया है, जो आम आदमी पार्टी के निवर्तमान सांसद हैं लेकिन वे कांग्रेस छोड़ कर ही आप में गए थे।

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