प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल करेंगे तो भाजपा के नए नेताओं को सरकार में जगह मिलेगी और साथ ही भाजपा की सहयोगी पार्टियों का भी प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ सहयोगी दलों के मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। जनता दल यू कोटे के मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का मंत्रालय बदलने की चर्चा है और साथ ही संजय झा के सरकार में आने की भी चर्चा है। मौजूदा सहयोगियों के अलावा एक नई सहयोगी पार्टी एनसीपीआई गठबंधन में शामिल हुई है। इसमें ममता बनर्जी की पार्टी से निकले 20 सांसद शामिल हुए हैं। इनमे से कम से कम दो नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार और सयानी घोष के नाम की चर्चा है। सयानी के नाम की चर्चा प्रवक्ता के लिए भी है। इसी तरह भाजपा की पुरानी सहयोगी अकाली दल की गठबंधन में वापसी हुई है तो कहा जा रहा है कि हरमिरत कौर बादल फिर से मंत्री बन सकती हैं।
सरकार में एकनाथ शिंदे की शिव सेना का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। अभी उसका एक ही मंत्री है। लेकिन कुछ समय पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद शिंदे की पार्टी में शामिल हुए। अब वह 13 सांसदों वाली पार्टी है। 12 सांसदों वाली जनता दल यू के दो मंत्री हैं। कहा जा रहा है कि श्रीकांत शिंदे को मंत्री पद मिल सकता है। शरद पवार की एनसीपी का सस्पेंस अभी बना हुआ है। अगर मामला सुलझ जाता है और पवार की पार्टी की एंट्री एनडीए में हो जाती है तो एक मंत्री पद उनको भी मिलेगा। हालांकि सुनेत्रा पवार की एनसीपी का कोई मंत्री केंद्र में नहीं है। वे चाहेंगी कि उनकी पार्टी से भी किसी को मौका मिले।
