समाजवादी पार्टी के सांसदों को लेकर संशय बढ़ गया है। सिर्फ इसलिए नहीं कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर ने एक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी में टूट हो सकती है। वे कई पुराने घोटालों आदि की मिसाल दे रहे हैं और रामगोपाल यादव के अमित शाह से मिलने की चर्चा कर रहे हैं। हालांकि बाद में शिवपाल यादव ने कहा कि इन बातों में कोई दम नहीं है और सैफई परिवार एकजुट है। सैफई परिवार हो सकता है कि एकजुट हो लेकिन पूरी सपा तो सैफई परिवार नहीं है।
कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश के भी अनेक सपा और कांग्रेस नेता संशय में हैं। उनको लग रहा है कि भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ तो अगला चुनाव मुश्किल होगा। कई नेताओं के बारे में खबर है कि वे विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं या परिवार से किसी को टिकट दिलाना चाहते हैं और मान रहे हैं कि भाजपा में जीतने के चांस ज्यादा हैं।
हालांकि अखिलेश यादव ने भी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति का माहौल बनाया है। ऊपर से अभी राममंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले से भी भाजपा बैकफुट पर आई है। फिर भी कहा जा रहा है कि अगर पार्टी टूटती नहीं भी है तो भाजपा की योजना मानसून सत्र में परिसीमन बिल पर कुछ सांसदों को गैरहाजिर कराने की है। पिछली बार अलग अलग पार्टियों के एक दर्जन सांसद गैरहाजिर रहे थे। इस बार 20 सांसदों को गैरहाजिर कराने की योजना है, जिसमें ‘इंडिया’ ब्लॉक की तीन प्रादेशिक पार्टियों सपा, राजद और जेएमएम पर नजर है।
