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राउत की किताब में दिलचस्प खुलासे

उद्धव ठाकरे की शिव सेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत बहुत दिलचस्प व्यक्ति हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति में उद्धव ठाकरे की पार्टी का चेहरा हैं। वैसे उद्धव की पार्टी के कई सांसद हैं लेकिन दिल्ली में उनकी पार्टी का प्रतिनिधित्व संजय राउत करते हैं। पिछले दिनों राज्यसभा के रिटायर हो रहे सांसदों का फेयरवेल भाषण चल रहा था कि एक सांसद ने कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और उद्धव ठाकरे की शिव सेना के संजय राउत से ज्यादा साहसी नेता नहीं देखा। कांग्रेस पार्टी के नेताओं को यह बात निश्चित रूप से नागवार गुजरी होगी क्योंकि उनकी नजर में सबसे साहसी राहुल गांधी हैं। बहरहाल, बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो उद्धव ठाकरे की पार्टी टूटने, सत्ता गंवाने, विधानसभा में बुरी तरह से हारने और बीएमसी चुनाव हार जाने के लिए संजय राउत को जिम्मेदार ठहराते हैं। वह अलग मामला है। कुछ समय पहले राउत को ईडी ने गिरफ्तार किया था और वे काफी समय जेल में रहे थे। जेल में उन्होंने एक किताब लिखी है, जिसमें में कई दिलचस्प किस्से हैं।

मराठी में लिखी गई यह किताब पिछले साल रिलीज हुई। अब उसका अंग्रेजी संस्करण आ रहा है तो चर्चा तेज हो गई है। मराठी में किताब का शीर्षक था ‘नरकतला स्वर्ग’ इसका अंग्रेजी संस्करण ‘अनलाइकली पैराडाइज’ के नाम से आ रहा है। किताब में संजय राउत ने कई बेहद विवादित दावे किए हैं। सबसे विवादित दावा तो यह है कि तत्कालीन उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को ईडी के दबाव में इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने लिखा है कि धनखड़ और उनकी पत्नी ने जयपुर का अपना घर बेचा और उसके पैसे विदेश ट्रांसफर किए। इसके बाद ईडी ने फाइल बनाई और जांच शुरू की। राउत ने यहां तक लिखा है कि जब मोदी सरकार के खिलाफ धनखड़ के कुछ करने की कानाफूसी शुरू हुई तो ईडी के अधिकारियों ने धनखड़ से मिल कर उनको फाइल दिखाई। जांच आगे बढ़ाने की धमकी दी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। मराठी किताब आए हुए कई महीने हो गए लेकिन आधिकारिक रूप से किसी ने इसका खंडन नहीं किया है। भाजपा नेताओं ने आलोचना जरूर की है लेकिन खंडन नहीं हुआ है। संभव है कि अंग्रेजी में किताब आने के बाद इसका दोनों तरफ से खंडन हो।

एक और दिलचस्प दावा संजय राउत ने यह किया है कि बाल ठाकरे और शरद पवार ने अमित शाह की सबसे ज्यादा मदद की। उन्होंने लिखा है कि जब अमित शाह की जमानत नहीं हो रही थी तब शरद पवार ने उनको जमानत दिलवाई थी। पूरा ब्योरा बताते हुए उन्होंने किताब में लिखा है कि महाराष्ट्र कैडर का एक सीबीआई अधिकारी जमानत का जबरदस्त विरोध कर रहा था। तब नरेंद्र मोदी ने शरद पवार को फोन करके मदद मांगी थी और सबकी मदद करने वाली अपनी आदत के मुताबिक शरद पवार ने मामले में दखल दिया और अमित शाह की जमानत कराई। शरद पवार को लेकर संजय राउत ने और भी कई दिलचस्प किस्से लिखे हैं, जिनमें नरेंद्र मोदी से जुड़े किस्से भी है। राउत ने लिखा है कि गोधरा और गुजरात दंगों की जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गिरफ्तार करने वाली थी। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार में शरद पवार मंत्री थे। उन्होंने कैबिनेट की बैठक में इसका विरोध किया और कहा कि एक चुने हुए मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करना उचित नहीं होगा। हालांकि बाद में नरेंद्र मोदी की सरकार में कई चुने हुए मुख्यमंत्री गिरफ्तार हुए। उन्होंने चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के यहां केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का भी ब्योरा लिखा है।

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