केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद वे कहीं नहीं दिखे। अमित शाह लगभग पूरी तरह से ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भी बिजनेस फोरम की बैठक हो या बाद का आयोजन वे इससे दूर रहे या शामिल हुए भी तो यह प्रयास किया कि किसी तरह से उनके ऊपर फोकस नहीं बने।
ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन यानी समापन के दिन अमित शाह दिल्ली में नहीं थे। वे तीन दिन के दौरे पर मुंबई चले गए। वहां उन्होंने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन यानी 17 सितंबर के अवसर पर भाजपा पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान चला रही है। सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे हो रहे हैं। इसलिए इस बार का अभियान खास है। इस अभियान में अमित शाह भी दूसरे किसी अन्य मंत्री की तरह शामिल हो रहे हैं और इससे भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, ब्रिक्स के लाइमलाइट से शाह के दूर रहने के पहले से ही इस बात की चर्चा हो रही है कि सरकार और पार्टी के कामकाज में वे पहले जैसे सक्रिय नहीं हैं।
