सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अच्छे दिन आने वाले हैं। खबर है कि केंद्र सरकार लद्दाख में एक निर्वाचित निकाय बनाने पर सिद्धांत रूप से सहमत हो गई है। दिल्ली में लद्दाख के नेताओं के साथ बातचीत में इस पर सहमति बनी है। हालांकि अभी इसकी घोषणा नहीं की गई है। सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को आगाह किया है कि वह जल्दी फैसला करे नहीं तो 19 सितंबर से फिर से लेह में प्रदर्शन शुरू हो सकता है। कहा जा रहा है कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 371 में एक नई धारा ‘के’ जोड़ने जा रही है, जिसमें राज्य के लिए एकक निर्वाचित निकाय की व्यवस्था होगी।
सवाल है कि क्या जम्मू कश्मीर की तरह लद्दाख में भी विधानसभा बनाई जा सकती है या वहां स्थानीय निकाय या स्वायत्त निकाय जैसी किसी संस्था का गठन होगा? गौरतलब है कि दिल्ली, पुडुचेरी आदि केंद्र शासित प्रदेशों में भी विधानसभा है। तभी कहा जा रहा है कि लद्दाख का दर्जा केंद्र शासित प्रदेश का ही रहेगा लेकिन वहां विधानसभा का गठन किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो पहले चुनाव के बाद सोनम वांगचुक वहां के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि एक बार विधानसभा बनने और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई पार्टियां चुनाव लड़ेंगी, फिर भी माना जा रहा है कि अगर विधानसभा बनती है तो पहले मुख्यमंत्री वांगचुक होंगे। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और इस समय जम्मू कश्मीर व लद्दाख दोनों के उप राज्यपाल की भूमिका निभा रहे वीके सक्सेना से भी उनके बहुत अच्छे संबंध हैं।
