महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री और एनसीपी की नेता सुनेत्रा पवार अपने हिसाब से राजनीति कर रही हैं। वे पार्टी के बड़े और पुराने नेताओं को ज्यादा महत्व नहीं दे रही हैं। सबने देखा है कि कैसे उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को किनारे किया। अब छगन भुजबल की बारी थी। भुजबल पिछले कई साल से इस बात के प्रयास कर रहे हैं कि पार्टी उनको राज्यसभा भेजे। इस बार भी उन्होंने जम के लॉबिंग की थी। लेकिन सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ ने छगन भुजबल की मांग पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने पार्टी के पूर्व एमएलसी राजेंद्र जैन को राज्यसभा सीट दे दी।
गौरतलब है कि सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री बनने और बाद में बारामती सीट से विधायक बनने की वजह से राज्यसभा की सीट खाली हुई थी। इसका चार साल का कार्यकाल बचा हुआ है। पहले कहा जा रहा था कि सुनेत्रा पवार के दूसरे बेटे जय पवार को इस सीट से भेजा जाएगा। लेकिन चूंकि बड़े बेटे पार्थ पवार को इसी साल राज्यसभा भेजा गया है इसलिए सुनेत्रा ने दूसरे नेता को भेजने का फैसला किया। छगन भुजबल सिर्फ राज्यसभा की सीट नहीं चाहते थे, बल्कि अपने भतीजे समीर भुजबल के लिए राज्य सरकार में मंत्री पद भी चाहते हैं। लेकिन अभी तक सुनेत्रा और पार्थ पवार ने इस मांग पर भी ध्यान नहीं दिया है। ऐसा लग रहा है कि शरद और अजित पवार की छाया से निकल मां और बेटा अपने हिसाब से राजनीति कर रहे हैं। इसमें उनको मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का पूरा समर्थन मिला हुआ है।
