नितिन नबीन की नई टीम के महामंत्रियों में से सुनील बंसल इकलौते महामंत्री हैं, जिन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है। वे पिछली टीम में भी महामंत्री थे। पिछली टीम से दो ही लोग नई टीम में रिपीट हुए हैं, जिनमें से एक वे हैं। पहली बार महामंत्री बनने के बाद से ही इस बात की चर्चा है कि वे संसद के किसी सदन में जाएंगे या नहीं। यह चर्चा इस बार भी है लेकिन कहा जा रहा है कि वे सांसद नहीं बनेंगे। ध्यानरहे सुनील बंसल संघ से भाजपा में आए हैं और उत्तर प्रदेश के सबसे शक्तिशाली महामंत्री रहे हैं। एक समय तो ऐसा था कि मीडिया में गॉसिप कॉलम में छपता था कि सुनील बंसल ही राज्य सरकार चला रहे हैं। उसके बाद वे राष्ट्रीय टीम में आ गए।
जानकार सूत्रों का कहना है कि उनकी अपनी मंशा भी संसद का सदस्य बनने की नहीं है क्योंकि वे आने वाले दिनों में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनना चाहते हैं। गौरतलब है कि भाजपा का संगठन महामंत्री पार्टी को संघ की ओर से दिया जाता है। आमतौर पर संगठन महामंत्री रहने वाला नेता चुनाव नहीं लड़ता है और न सरकार में कोई पद स्वीकार करता है। अभी बीएल संतोष महामंत्री हैं। उनसे पहले रामलाल थे, जो हटने के बाद वापस संघ में चले गए। बीएल संतोष की इच्छा कर्नाटक जाने और मुख्यमंत्री बनने की बताई जाती है। बहरहाल, सुनील बंसल की नजर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की कुर्सी पर है। वे अभी अपेक्षाकृत युवा हैं और इसलिए जल्दबाजी में नहीं हैं।
