हो सकता है कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि समझ रहे हों कि वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन वे देश का बड़ा नुकसान कर रहे हैं। वे राष्ट्रगान के नाम पर विधानसभा में अभिभाषण नहीं पढ़ कर यह दिखाना चाह रहे हैं कि उनके मन में बड़ा देशप्रेम है और तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके देश विरोधी है और इससे हो सकता है कि भाजपा की राजनीति को कुछ फायदा भी होता हो लेकिन इससे देश का बड़ा नुकसान हो रहा है। तमिलनाडु में अलगाव की भावना पहसे से ज्यादा गहरी होती है। पता नहीं इतनी बेसिक बात राज्यपाल और भारत सरकार समझ क्यों नहीं पा रही है।
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने इस बार लगातार चौथे साल विधानसभा में सरकार का लिखा अभिभाषण नहीं पढ़ा। वे हर बार एक ही बहाना करते हैं। उनका कहना है कि सदन की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान से होनी चाहिए, जबकि तमिलनाडु में सदन की कार्यवाही तमिल गान से होती है और समापन राष्ट्रगान से होता है। बरसों से वहां ऐसा ही होता है। रवि इसे बदलना चाहते हैं। लेकिन राज्य सरकार नहीं बदल रही है। इस आधार पर वे हर साल पहले सत्र की कार्यवाही के दौरान अभिभाषण नहीं पढ़ते हैं। इस बार भी उन्होंने अभिभाषण नहीं पढ़ा। उनके चले जाने के बाद स्पीकर ने अभिभाषण पढ़ा। वे अपनी निष्ठा के प्रदर्शन में ऐसा करते हैं लेकिन हो सकता है कि इसका लाभ डीएमके को ही मिल जाए। ध्यान रहे एक तरफ भाजपा राष्ट्रवाद का मुद्दा बनाती है तो दूसरी ओर डीएमके ने तमिल उप राष्ट्रीयता और सनातन विरोध को अपना चुनावी मुद्दा बनाया है।
