अमित शाह की खासियत है कि वे लक्ष्य छोटा नहीं तय करते हैं। वे उत्तराखंड गए थे और लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ रैली में हिस्सा लिया। उन्होंने वहां अगले चुनाव में 65 सीट जीतने का लक्ष्य तय किया। गौरतलब है कि तीन महीने के बाद उत्तराखंड में चुनाव होने वाले हैं, जहां भाजपा लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने के लिए मैदान में उतरेगी। लगातार 10 साल के शासन में सरकार के खिलाफ एंटी इन्क्बैंसी भी बनी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता भी पहले जैसी नहीं है। फिर भी अमित शाह ने तीन चौथाई से ज्यादा सीट जीतने का लक्ष्य तय कर दिया है। हालांकि भाजपा के नेता इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि 36 का बहुमत पार कर लें, इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
पिछले चुनाव में यानी 2022 में भाजपा को 47 सीटें मिली थीं और कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। दो सीटें बसपा को मिली थीं। भाजपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2017 में था, जब उसने 57 सीटें जीती थीं। पांच साल की कांग्रेस सरकार में कई प्रयोग हुए थे। कांग्रेस ने हरीश रावत की बजाय विजय बहुगुणा को सीएम बनाया था। बाद में फिर रावत बने। इससे पार्टी के अंदर बहुत विभाजन था, जिसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ा। तब भी भाजपा 57 सीट जीती थी और कांग्रेस 11 सीटों पर रह गई थी। इस बार शाह ने 70 में से 65 सीट का लक्ष्य रख दिया है। भाजपा के नेता भी इसे असंभव मान रहे हैं। हालांकि दूसरे राज्यों में इस तरह के नतीजे आए हैं। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने 2015 के चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीत गई थी।
