असम में भारतीय जनता पार्टी के अंदर का विवाद समाप्त नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को बार बार सफाई देनी पड़ रही है। उन्होंने कहा है कि भाजपा राज्य की 126 में से 90 सीटों पर लड़ रही है और टिकट के लिए 14 सौ के करीब आवेदन मिले थे। जाहिर है सबको एडजस्ट नहीं किया जा सकता है। हालांकि उनकी बात का ज्यादा असर नहीं हो रहा है। इसका कारण यह है कि 14 सौ के करीब आवेदन देने वाले इस बात से नाराज नहीं हैं कि उनको टिकट नहीं मिली। वे इस बात से नाराज हैं कि कांग्रेस से आए लोगों को ज्यादा टिकट मिली है। ध्यान रहे पिछले कुछ समय से भाजपा के नेता असम प्रदेश के कांग्रेसीकरण से परेशान थे। अब टिकट बंटवारे के बाद उनकी नाराजगी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि 2015 में भाजपा में शामिल होने के बाद से ही हिमंत बिस्वा सरमा ने भाजपा के पारंपरिक चेहरों को दरकिनार करने और कांग्रेस से लाकर नेताओं को महत्व देने का काम किया। यह काम अभी तक जारी है।
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सांसद प्रद्योत बोरदोलोई को भाजपा में शामिल किया गया और उनको दिसपुर से टिकट भी मिली। इसी तरह फरवरी में ही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा को भाजपा में शामिल कराया गया और उनको भी टिकट मिली है। भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि भाजपा जिन 90 सीटों पर लड़ रही है उनमें से 28 सीटों पर पूर्व कांग्रेसी नेता लड़ रहे हैं। ये सारे नेता 2015 के बाद कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हैं। इसका अर्थ है कि हिमंत बिस्वा सरमा ने भाजपा की एक तिहाई टिकट पूर्व कांग्रेस नेताओं को दी है। तभी भाजपा के हार्डकोर पुराने नेता मान नहीं रहे हैं। सरमा का दावा है कि उन्होंने कई नेताओं को मना लिया और चुनाव नहीं लड़ने के लिए तैयार किया है। लेकिन अब भी दर्जनों सीटों पर भाजपा के बागी चुनाव लड़ रहे हें। नाम वापसी की तारीख बीतने के बाद ही पता चलेगा कि सरमा और भाजपा की पूरी टीम लग कर कितने बागियों को मना पाई। राज्य में नौ अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है।
