वेदांता समूह पर ईडी की छापे की कार्रवाई की ज्यादातर व्याख्या इस नजरिए से हो रही है कि उन्होंने जेपी समूह के अधिग्रहण को चुनौती दी थी। असल में पहले वेदांता समूह ने भी बोली लगाई थी और कीमत के लिहाज से उनकी बोली बड़ी थी। लेकिन बाद में एडवांस ज्यादा देने का वादा अडानी समूह ने किया और बोली उनको मिल गई। बाद में वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल ने फैसले पर सवाल उठाया और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दीं। हालांकि वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। तभी ज्यादातर लोग मान रहे हैं कि अडानी समूह को चुनौती देने के कदम को हिमाकत माना गया और सबक सिखाने के लिए छापा पड़ा। चूंकि अनिल अग्रवाल बिहार के रहने वाले हैं इसलिए सामान्य व्याख्या से थोड़ी अलग बिहारी व्याख्या है। जैसे बिहार के एक सांसद हैं सुधाकर सिंह उन्होंने इसे बिहार की अस्मिता पर हमला बताया। पिछले कुछ समय से बिहारी उप राष्ट्रीयता का मामला चलाने की कोशिश हो रही है। पहले प्रशांत किशोर ने कोशिश की और अब राजद के सांसद सुधाकर सिंह ने की है। उन्होंने इसे गुजरात बनाम बिहार बनाने का प्रयास किया है। इसके अलावा एक अन्य जानकार पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ने एक नया ट्विस्ट दिया है। उनका कहना है कि अनिल अग्रवाल पिछले कुछ दिन से बिहार में निवेश करने की बात करने लगे थे। उनका कहना है कि इस वजह से उनको सबक सिखाया गया है।
वेदांता पर छापे की बिहारी व्याख्या
