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पांडा के बिल पर चर्चा होनी चाहिए

यह अलग बात है कि भाजपा के सांसद बैजयंत जय पांडा अपना प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश नहीं कर सके क्योंकि शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के तीन मिनट के भीतर स्थगित हो गई। दोबारा 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो सिर्फ सात मिनट में उसे पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। अगर संसद चलती तो बैजयंत पांडा अपना प्राइवेट मेंबर बिल पेश करते। उनका यह प्रयास दूसरी बार फेल हुआ है। असल में पांडा ने शील्ड नाम से बिल तैयार किया है, जिसमें बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को नियंत्रित करने या रोकने के उपाय बताए गए हैं।

सारी दुनिया के लिए यह सबसे बड़ी समस्या है कि कैसे बच्चों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बचाएं। दुनिया के कई देशों ने इसे रोकने के कानून बना दिए हैं। भारत में भी आंध्र प्रदेश जैसे राज्य इसकी तैयारी कर रहे हैं। हाल में एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि होमो सेपियंस के इतिहास में संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है मौजुदा पीढ़ी, जिसे जेन जेड कहा जा रहा है वह पिछली पीढ़ी यानी मिलेनियल्स से कम बुद्धिमान है। अमेरिका और यूरोप के सर्वे से यह पता चला है। इसके पीछे मुख्य कारण बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग है। इसलिए यह जरूरी है कि बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग कम कराई जाए और सोशल मीडिया इस्तेमांल को नियंत्रित किया जाए। पांडा के बिल में 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने के उपाय हैं।

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