यह कमाल का विरोधाभास देखने को मिला। तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गाया गया लेकिन पश्चिम बंगाल में नहीं गाया गया था। तमिलनाडु में टीवीके नेता विजय ने रविवार, 10 मई को शपथ ली तो उनके शपथ समारोह की शुरुआत से पहले राष्ट्रगीत यानी ‘वंदे मातरम’ गाया गया। ‘वंदे मातरम’ को लेकर बने नए प्रोटोकॉल के तहत सभी छह अंतरे गाए गए। उसके बाद राष्ट्रगान बजा और तब तमिलनाडु का राज्य गीत गाया गया। फिर जब विजय और उनके नौ मंत्रियों की शपथ का कार्यक्रम खत्म हुआ तब भी इसी क्रम में पहले ‘वंदे मातरम’, फिर ‘जन गण मन’ और अंत में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ बजा।
विरोधाभास इसलिए है कि उससे एक दिन पहले शनिवार, नौ मई को कोलकाता में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ली तो उस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ से हुई और समापन भी उसी से हुआ। सोचें, ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी बंगाल के थे। इसी साल केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ के डेढ़ सौ साल होने के मौके पर संसद में विशेष चर्चा कराई और ‘वंदे मातरम’ के लिए प्रोटोकॉल तय कराया। इसे राष्ट्र गान की तरह सम्मान देने का फैसला हुआ। लेकिन ‘वंदे मातरम’ के रचयिता की धरती पर इसका गायन नहीं हुआ। उधर तमिलनाडु में एक समारोह में दो बार इसका गायन हुआ।
