संसद के मानसून सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत हासिल करने की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए कई मॉडल अपनाए जा रहे हैं। एक मॉडल यह है कि सांसदों को दूसरी पार्टियों से तोड़ कर सीधे भाजपा में शामिल कराने का है, जैसा पंजाब और दिल्ली के आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के साथ हुआ। दूसरा मॉडल अपने बहुमत वाले राज्य में विपक्ष के राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे कराने का है, जैसा ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हुआ। तीसरा मॉडल विपक्षी पार्टियों के सांसदों को अपनी किसी सहयोगी पार्टी में शामिल कराने का है, जैसा महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के लोकसभा सांसदों के साथ हुआ हुआ। चौथा मॉडल विपक्षी पार्टियों के सांसदों को तोड़ कर किसी नामालूम सी पार्टी में शामिल कराने और उसे गठबंधन में मिलाने का है, जैसा बंगाल के लोकसभा सांसदों के साथ हुआ। पांचवां मॉडल, पार्टी को तोड़ कर अलग गुट की मान्यता दिलाने का है, जैसा बंगाल विधानसभा में हुआ है।
इसके अलावा एक मॉडल नए सहयोगी बनाने का है। ऐसा लग रहा है कि भाजपा ने पूर्वोत्तर के उसके गठबंन से बाहर रह गई पार्टियों को एनडीए में लाने का खेल शुरू कर दिया है। ध्यान रहे मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी हमेशा एनडीए से बाहर रहा है। लेकिन अब मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी जेडपीएम के सांसद केंद्र की एनडीए सरकार का समर्थन करेंगे। हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए जेडपीएम के सांसद लालतलुआंगकिमा ने कहा है कि वे संसद में एनडीए सरकार को मुद्दो पर आधारित समर्थन देंगे। ध्यान रहे राज्य में जेडपीएम किसी गठबंधन में नहीं है। लोकसभा में भी उसके एक सांसद हैं। पार्टी ने तय किया है वह तटस्थ रहेगी लेकिन सरकार को मुद्दा आधारित समर्थन देगी। जेडपीएम के समर्थन के बाद दोनों सदनों में सरकार को एक एक अतिरिक्त सांसद का समर्थन मिल गया।
