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वंदे मातरम् बिल पर विपक्ष चर्चा नहीं चाहता था!

New Delhi, Jul 31 (ANI): Presiding officer Dilip Saikia conducts the proceedings of the Lok Sabha during the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Friday. (Sansad TV/ANI Video Grab)

यह कमाल की बात है कि सरकार ने राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का बिल बिना किसी ज्यादा विवाद और बिना किसी खास चर्चा के पास करा लिया। असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ सांसदों ने इसका खुल कर विरोध किया। लेकिन विपक्ष के ज्यादातर सांसद इस पर चर्चा से दूर रहे। विपक्षी सांसदों ने अनौपचारिक चर्चा से भी इस विषय को दूर रखा। संसद परिसर में विपक्ष के सांसद पत्रकारों से कहते मिले कि इस विषय को छोड़ दें। असल में यह ऐसा संवेदनशील मसला था, जिसमें कोई भी स्टैंड विपक्ष को नुकसान पहुंचा सकता था।

याद करें इससे पहले वंदे मातरम के डेढ़ सौ साल पूरे होने पर एक दिन की चर्चा हुई थी तब प्रियंका गांधी वाड्रा ने हल्की फुल्की बातें कही थीं और वंदे मातरम के पहले दो अंतरे को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में स्वीकार किए जाने की बात कही थी। लेकिन बिल पर चर्चा के दौरान राहुल और प्रियंका दोनों गायब रहे। कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि कोई भी विपक्षी नेता इस पर स्टैंड लेना इसलिए नहीं चाहता था कि अगर वह बिल का बहुत जोरदार तरीके से विरोध करेगा तो बहुसंख्यक हिंदू समाज में इसका गलत मैसेज जाएगा और अगर बिल का समर्थन करेगा या गोलमोल बात करेगा तो मुस्लिम समाज में नाराजगी होगी। इसलिए विपक्ष ने चर्चा से दूर रहने का फैसला किया। सरकार वैसे भी बिल पास करा लेती लेकिन चर्चा से विपक्ष की अनिच्छा ने उसका काम और आसान कर दिया।

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