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तमिलनाडु की दोनों द्रविड पार्टियों की समस्या

तमिलनाडु की दोनों द्रविड पार्टियों, जिन्होंने करीब 60 साल तक बारी बारी से राज्य में शासन किया उनकी हालत खराब है। छह दशक में पहली बार ऐसा हुआ कि दोनों द्रविड पार्टियां एक साथ सत्ता से बाहर हो गईं और एक नई पार्टी का राज्य की राजनीति में उदय हुआ। फिल्म स्टार विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी और छोटी पार्टियों के समर्थन से उसने सरकार बना लिया। इस संकट का सबसे पहला असर अन्ना डीएमके पर पड़ा, जिसके दो टुकड़े हो गए हैं। 30 विधायकों का एक धड़े ने अलग नेता चुना है और 17 विधायकों ने पार्टी महासचिव ई पलानीसामी को नेता चुना है। स्पीकर को फैसला करना है कि असली पार्टी कौन सी है।

लेकिन ऐसा नहीं है कि एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके में सब कुछ ठीक है। अभी लग रहा है कि कोई परेशानी नहीं है लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि स्टालिन के लिए भी अपने बेटे उदयनिधि को विधायक दल का नेता चुनवाना आसान नहीं होगा। उनके साथ समस्या यह है कि खुद स्टालिन कोलाथुर सीट से चुनाव हार गए हैं। अगर वे जीते होते तो उनको नेता चुनने में किसी को समस्या नहीं आती। लेकिन उदयनिधि के नाम पर कई विधायकों को आपत्ति है। वे अलग अलग तरीके से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। तभी स्टालिन ने विधायक दल की बैठक टाल दी। कहा जा रहा है कि उदयनिधि के नाम पर सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

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