उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के अंदर एक बार फिर गुटबाजी तेज हो गई है। पार्टी को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी फिशिंग कर रही है तो दूसरी ओर नेता आपस में उलझे हैं। ईडी ने पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी रहे और अभी उनके पीए के तौर पर काम कर रहे चंदन जीना के यहां छापा मारा। उनके यहां से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की बरामदगी की भी खबर आई। उसके बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि ऐसा करने के लिए किसी ने उनको कहा नहीं था। तब माना गया कि वे अब खुद ब खुद नेतृत्व की रेस से हट रहे हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ।
हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पद की रेस से खुद को अलग करने की बजाय ज्यादा गंभीरता से अपनी तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने पूरे प्रदेश में ‘धन्यवाद एवम जनसंवाद यात्रा’ शुरू कर दी। इसके लिए भी उन्होंने किसी से बात नहीं की और न पार्टी आलाकमान की मंजूरी ली। इसके बाद उनकी शिकायत पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनको दिल्ली तलब किया। बताया जा रहा है कि खड़गे ने उनसे कहा कि वे अपनी यात्रा स्थगित करें। उनसे कहा गया है कि पार्टी जल्दी ही सभी नेताओं के साथ बैठक कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोंदियाल और विधायक दल के नेता यशपाल आर्य की अपनी दावेदारी है। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि ब्राह्मण और दलित समीकरण पर जाए या ठाकुर को भी उसमें शामिल करे। भाजपा की ओर से पुष्कर सिंह धामी सीएम हैं और सीएम का चेहरा हैं इसलिए ठाकुर वोट टूटने की संभावना कम दिख रही है।
