प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कब अपनी सरकार में फेरबदल करेंगे इसका सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। लेकिन जब भी संगठन में बदलाव हो रहा है या राज्यसभा के चुनाव हो रहे हैं तो सरकार में नई वैकेंसी बन जा रही है। तीन मंत्रियों के इस्तीफे हुए हैं, तीन मंत्री संगठन में गए हैं और दो मंत्रियों की राज्यसभा रिन्यू नहीं हुई है। इस तरह आठ वैकेंसी बन गई है। हालांकि इस वैकेंसी को भरने की जल्दी प्रधानमंत्री को नहीं दिख रही है। इस बार उत्तर प्रदेश की आठ सीटों के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया तो मोदी सरकार में दो और वैकेंसी बनने का रास्ता साफ हुआ। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को टिकट नहीं दी। हालांकि अभी दोनों का कार्यकाल समाप्त नहीं हुआ है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी छह महीने तक दोनों मंत्री बनी रह सकते हैं। लेकिन उसके बाद भी राज्यसभा या लोकसभा की कोई वैकेंसी नहीं है, जहां से इन दोनों को संसद पहुंचाया जाएगा। इसलिए इस्तीफा तो होना है। सिर्फ समय की बात है कि कब इस्तीफा होता है।
इससे पहले भाजपा ने संगठन में फेरबदल किया तो उससे भी वैकेंसी क्रिएट हुई। नितिन नबीन की टीम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वे दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हालांकि जानकार सूत्रों का कहना है कि उनके लिए अपवाद बनाया जा सकता है। यानी वे सरकार और संगठन दोनों जगह रह सकते हैं। लेकिन यह छूट शायद हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को नहीं मिले। कुछ समय पहले हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि यह किसी को समझ में नहीं आया कि वीरेंद्र सचदेवा को क्यों हटाया गया। राज्य में कोई चुनाव भी नहीं था। फिर भी एक पंजाबी को हटा कर दूसरा पंजाबी अध्यक्ष बनाया गया। मल्होत्रा सरकार में मंत्री बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश में चुनाव था और सामाजिक समीकरण के हिसाब से जाट नेता भूपेंद्र सिंह को हटा कर पिछड़ी जाति से आने वाले पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाया गया। वे भी केंद्र में मंत्री बने हुए हैं।
इससे पहले अप्रैल में जब राज्यसभा के दोवार्षिक चुनाव हुए तब रिटायर हो रहे दो सदस्यों को दोबारा टिकट नहीं मिली। पंजाब के रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा गए थे। उनका कार्यकाल खत्म हुआ तो उनको पंजाब भेजा गया है। बताया जा रहा है कि वे वहां से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। इसी तरह केरल के रहने वाले जॉर्ज कुरियन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। लेकिन उनका भी कार्यकाल रिन्यू नहीं हुआ। बाद में दोनों ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। इस तरह तीन मंत्रियों को इस्तीफे हो चुके हैं। पीयूष गोयल, पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। और अब हरदीप सिंह पुरी व बीएल वर्मा का कार्यकाल रिन्यू नहीं हुआ है। इस तरह मोदी सरकार में आठ वैकेंसी बन गई है। अब अगर मोदी अपनी सरकार से किसी को नहीं भी हटाते हैं तो आठ से 10 लोगों को मंत्री बना सकते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि अभी मंत्रिपरिषद में तुरंत बदलाव होता नहीं दिख रहा है। महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन के बारे में कोई फैसला होने के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। ध्यान रहे सरकार ने अभी तक संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है। कहा जा रहा है दो तिहाई बहुमत जुटाने के लिए बातचीत चल रही है।
