सोमवार, 18 मई को केरलम में वीडी सतीशन के साथ 20 मंत्रियों की शपथ कराई गई। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शपथ दिलाई। सोचें, एक हफ्ते पहले ही उन्होंने तमिलनाडु में भी मुख्यमंत्री और मंत्रियों को शपथ दिलाई थी। यह भी एक तरह का रिकॉर्ड ही होगा कि एक हफ्ते में एक राज्यपाल दो दो बड़े राज्यों के मुख्यमंत्रियों की शपथ कराए। असल में आरएन रवि के तमिलनाडु से हटा कर पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाए जाने के बाद केरल के राज्यपाल आर्लेकर ही तमिलनाडु के प्रभारी हैं।
बहरहाल, तमिलनाडु की तरह केरलम में भी शपथ ग्रहण समारोह शुरू होने से पहले राजकीय समारोहों को प्रोटोकॉल के मुताबिक वंदे मातरम का गायन हुआ। तमिलनाडु और केरल दोनों जगह राष्ट्रगीत यानी वंदे मातरम के सभी छह छंद गाए गए। उसके बाद राष्ट्रगान हुआ और तब शपथ समारोह हुआ। समापन भी इसी तरह से हुआ। लेकिन हैरानी की बात है कि न तो पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण के राजकीय समारोह में वंदे मातरम गाया गया और न असम में वंदे मातरम का गायन हुआ। यह हैरान करने वाला इसलिए भी है क्योंकि दोनों जगह भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली और दोनों जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों समारोह में शामिल हुए। सोचें, जहां भाजपा विरोधी पार्टियों की सरकार बनी वहां वंदे मातरम गाया गया और जहां भाजपा की सरकार बनी वहां नहीं गाया गया! एक राज्य तो पश्चिम बंगाल है, जो वंदे मातरम की रचना भूमि है। क्या भाजपा यह दिखा रही है कि उसके ऊपर प्रोटोकॉल लागू नहीं होता?
