Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

व्यापमं की जांच इंस्पेक्टर मातादीन स्टाइल में

महान साहित्यकार हरिशंकर परसाई मध्य प्रदेश के ही थे। उनकी एक व्यंग्य रचना है ‘इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर’। इसमें वे बताते हैं कि कैसे इंस्पेक्टर मातादीन ने चांद पर की पुलिस को जांच के तरीके सिखाए थे। उसमें एक तरीका गवाहों को लेकर था। इंस्पेक्टर मातादीन ने चश्मदीद गवाह को परिभाषित करते हुए कहा कि चश्मदीद गवाह वह नहीं होता है, जो मौके पर मौजूद रहे, बल्कि वह होता है, जो अदालत में कहे कि वह मौके पर मौजूद थे। इसी तरह उन्होंने पुलिस को यह भी सिखाया कि पुलिस के पास हर समय गवाहों का एक स्टॉक होना चाहिए, जो पुलिस के हिसाब से अदालत में अपनी बात रखे।

इस व्यंग्यस रचना के बारे में ध्यान तब आया, जब यह खबर दिखी की मध्य प्रदेश के सबसे बड़े भर्ती घोटाले यानी व्यापमं घोटाले में जांच कुछ इसी अंदाज में हो रही है। पुलिस के पास एक व्यक्ति ऐसे है, जो इस घोटाले से जुड़े सभी 847 मामलों में गवाह है। सोचें, एक व्यक्ति 847 मामले! वैसे यह पहला मामला नहीं है। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने भी एक गवाह को करीब डेढ़ सौ मामलों में पेश किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी नाराजगी जताई थी। बहरहाल, एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के दीपक कुशवाहा व्यापमं से जुड़े 847 मामलों में गवाह हैं। उन्होंने कई मामलों में गवाही दी। 2011 की शिक्षक की बहाली से लेकर सिपाही की बहाली और खाद्य आपूर्ति में बहाली से लेकर 2012 के प्री मेडिकल टेस्ट तक में हुई गड़बड़ियों में दीपक कुशवाहा गवाह हैं। खबर यह भी है कि यह गवाह कई बार बयान भी बदल चुका है।

Exit mobile version