Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

राहुल के हाइड्रोजन बम का इंतजार

राहुल गांधी की हाइड्रोजन बम वाली चेतावनी के दो हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं। उन्होंने सितंबर के पहले हफ्ते में कहा था कि उनके पास वोट चोरी का एटम बम से भी बड़ा हाइड्रोजन बम है, जिसे फोड़ेंगे तो सब खत्म हो जाएगा। उसके बाद से इस बात का कयास लगाए जा रहे हैं, जैसे 22 पन्नों के प्रजेंटेशन के जरिए उन्होंने एटम बम फोड़ा था और कर्नाटक की बेंगलुरू सेंट्रल सीट के तहत आने वाली महादेवपुरा विधानसभा सीट पर एक लाख वोट की चोरी का आरोप लगाया था वैसे हाइड्रोजन बम की प्रेजेंटेशन कितनी बड़ी होगी और किस राज्य की कौन सी सीट पर वोट चोरी का आंकड़ा राहुल गांधी पेश करेंगे। एक अनुमान यह लगाया गया है कि हो सकता है कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट का आंकड़ा दें, जहां कांग्रेस के प्रत्याशी रहे अजय राय का दावा है कि वे चुनाव जीत रहे थे, सात राउंड तक आगे चल रहे थे लेकिन उसके बाद वोट चोरी करके उनको हरवाया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत सुनिश्चित की गई।

बहरहाल, अब इन अटकलों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि राहुल कब तक हाइड्रोजन बम का विस्फोट करेंगे? क्या वे बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं? यह सिर्फ अंदाजा है लेकिन कांग्रेस के ही नेता इस अंदाजे को हवा दे रहे हैं कि बिहार विधानसभा का चुनाव नजदीक आने पर राहुल गांधी वोट चोरी के नए आरोपों का खुलासा करेंगे ताकि बिहार में कुछ लाभ मिल सके। ध्यान रहे राहुल ने तेजस्वी यादव के साथ मिल कर बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा की थी। तभी बिहार में इस कथित हाइड्रोजन बम का अधिकतम लाभ मिलने की उम्मीद कांग्रेस के नेता कर रहे हैं। लेकिन सवाल है कि क्या कांग्रेस के पास ऐसा तंत्र है, जो इतने बड़े मुद्दों का राजनीतिक लाभ ले सके?

यह सवाल इसलिए है क्योंकि महादेवपुरा में एक लाख वोट चोरी के दस्तावेज पेश करके कथित तौर पर एटम बम फोड़ने के बाद कांग्रेस ने क्या किया यह किसी को पता नहीं है। असल में कांग्रेस के पास कोई फॉलोअप का सिस्टम नहीं है। राहुल गांधी आरोप लगा कर या कोई बात कह कर आगे बढ़ जाते हैं और उनकी पार्टी उसको भूल जाती है। अगर कांग्रेस के पास सबूत हैं कि महादेवपुरा में एक लाख वोट चोरी हुए हैं और चोरी करने के पांच तरीकों की जानकारी भी कांग्रेस के पास है तो उसने इसको मुद्दा क्यों नहीं बनाया? कांग्रेस की सारी लड़ाई कागजों पर है। वह जमीन पर उतर कर नहीं लड़ रही है। अगर जमीन पर उतर कर लड़ती तो उसके कार्यकर्ता महादेवपुरा के एक एक घर से रिपोर्ट निकाल सकते थे। जमीनी स्तर पर आंदोलन छेड़ा जा सकता था। इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती थी। राज्य में कांग्रेस की सरकार है वह इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर सकती थी। लेकिन इनमें से कोई काम नहीं हुआ। कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर नहीं उतरे। खुद राहुल गांधी महादेवपुरा का खुलासा करके बिहार में यात्रा करने चले गए। जब उनको लग रहा है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में वोट चोरी करके भाजपा जीती है और लोकसभा चुनाव में भी गड़बड़ी हुई है तो इन आरोपों को किसी तार्किक परिणति तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। हाइड्रोजन बम तो जब फूटेगा तब फूटेगा लेकिन उससे पहले यह तो सुनिश्चित करना चाहिए कि एटम बम से किसी को खरोंच तो आए!

Exit mobile version