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केंद्रीय पर्यवेक्षक की रीलबाजी से क्या हुआ?

उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी और कथित इनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजयपाल शर्मा को केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर पश्चिम बंगाल भेजा गया था। खबरों में बताया गया कि उनका नाम पहले सूची में नहीं था। लेकिन बाद में खासतौर से उनको भेजा गया और उनकी ड्यूटी लगाई गई दक्षिण 24 परगना के फालता इलाके में। अजयपाल शर्मा ड्यूटी पर रिपोर्ट करते ही दनदनाते हुए फालता पहुंचे और एक जबरदस्त रील बनवाई। वह रील बहुत वायरल हुई। वह लंबी वीडियो थी, जिसमें कई तरह के तमाशे थे। उन्होंने फालता में तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विधायक और उम्मीदवार जहांगीर खान का नाम लेकर चेतावनी दी। शर्मा ने कहा कि अगर मतदातओं को धमकाने की खबर मिली या कोई घटना हुई तो अंजाम बुरा होगा। कहा गया कि उनको मतदाताओं को धमकाए जाने की सूचना मिली थी। इस नौटंकी में यह भी दिखाया गया कि लोग इतने डरे हुए हैं कि जहांगीर खान का घर नहीं बता रहे हैं।

सोचें, कैसी नौटंकी है? मौजूदा विधायक और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के घर का पता लगाना कौन सी बड़ी बात है? पूरे इलाके में दसों जगह उसके कार्यालय बने हैं। लेकिन यह नैरेटिव बनाया गया कि लोग घर नहीं बता रहे हैं। इसके लिए अजयपाल शर्मा ने एक कर्मचारी को फटकार लगाते हुए वीडियो बनवाई। बाद में उस कर्मचारी का तबादला भी हो गया। लेकिन इस नौटंकी, रीलबाजी का क्या हुआ? फालता विधानसभा की 285 बूथों में से करीब 280 बूथों पर भाजपा को पोलिंग एजेंट नहीं मिला। सोचें, अजयपाल शर्मा की रीलबाजी में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल के जवान भी दिख रहे थे।

ये सारे लोग मिल कर पोलिंग एजेंट को सुरक्षा का भरोसा नहीं दिला पाए, जबकि रील बनाने का काम मतदाताओं का भय खत्म करने के लिए हो रहा था। इस तमाम नौटंकी के बाद नतीजा यह हुआ कि चुनाव आयोग को फालता विधानसभा का चुनाव रद्द करना पड़ा है। अब वहां 21 मई को नए सिरे से मतदान होगा। इसका कारण यह है कि मतदान के दौरान कई जगह ईवीएम से छेड़छाड़ और कई जगह मतदाताओं को धमकाने की घटना हुई। अगर अजयपाल शर्मा ने रील बनवाने और नौटंकी करने की बजाय जमीनी स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम किया होता तो शायद चुनाव रद्द करने की स्थिति नहीं बनती।

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