प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेस कोर्स रोड का नाम लोक कल्याण मार्ग कर दिया। जैसे उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ और राजपथ का नाम कर्तव्य पथ किया। जब रेस कोर्स नाम था तब एक साहित्यकार ने तंज करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री के आवास के सामने घोड़ों पर करोड़ों के दांव लगते हैं। असल में दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग पर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने रेस कोर्स है, जहां घोड़ों की रेस होती है। वहीं दिल्ली जयपुर पोलो क्लब है और वहां कई बड़े लोगों के स्डट फार्म घोड़ों के अस्तबल हैं। प्रधानमंत्री के आवास के एक तरफ जिमखाना क्लब है, जिसके बारे में सरकार के एक सूचना सलाहकार का जोर देकर कहा है कि वह दारूबाजों का अड्डा है। यह अच्छी बात है कि एक तरफ नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी है, जिसका नाम अब प्रधानमंत्री मेमोरियम म्यूजियम एंड लाइब्रेरी कर दिया गया है। प्रधानमंत्री का जहां आवास है उससे थोड़ी दूरी पर कई झुग्गी झोपड़ियां भी हैं।
प्रधानमंत्री के निवास के आसपास का भूगोल समझाने का मतलब यह बताना है कि वह कमाल की जगह है। वहां सबसे ताकतवर व्यक्ति का घर है तो वहां देश की सबसे समृद्ध लाइब्रेरी है और वहां सट्टेबाजी और दारूबाजी के अड्डे हैं तो सबसे गरीब लोगों का आशियाना भी है। लेकिन अब सब कुछ बदल रहा है। खुद प्रधानमंत्री वहां से शिफ्ट होने वाले हैं। संसद के आसपास प्रधानमंत्री एन्क्लेव बन रहा है। 15 एकड़ में बन रही यह इमारत तैयार होने वाली है। इससे पहले नया प्रधानमंत्री कार्यालय बना और उप राष्ट्रपति एन्क्लेव भी बना। हालांकि नए उप राष्ट्रपति एन्क्लेव के पहले निवासी जगदीप धनखड़ थे, जिनको बहुत बेआबरू होकर वहां से निकलना पड़ा था।
सवाल है कि जब प्रधानमंत्री लोक कल्याण मार्ग से शिफ्ट होने वाले हैं और पीएम एन्क्लेव में रहेंगे तो फिर लोक कल्याण मार्ग के आसपास इतनी सफाई क्यों हो रही हैं? क्यों सब कुछ हटाया जा रहा है? जिमखाना क्लब से लेकर रेस कोर्स रोड और दिल्ली जयपुर पोलो ग्राउंड से लेकर गरीबों की झुग्गियों तक सब को हटाया जा रहा है। सरकार ने दिल्ली जयपुर पोलो ग्राउंड का तो कब्जा भी ले लिया। इसका मामला थोड़ा पहले से चल रहा था और अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद सरकार के भूमि व विकास विभाग ने उसका कब्जा ले लिया। जिमखाना को खाली करने का नोटिस सरकार ने भेज ही दिया है। उसकी एक समय सीमा तय थी। लेकिन अदालत ने अभी रोक लगा दी है। पर कहते हैं न कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी। सरकार को खाली कराना है तो वह खाली करा लेगी। इस बीच खबर है कि लोक कल्याण मार्ग के आसपास स्थित तीन झुग्गियों पर बुलडोजर चल गया है। भाईराम कैम्प, डीआईडी कैम्प और मस्जिद कैम्प तीनों को तोड़ दिया गया है। सरकार जहां भी ऐसी झुग्गियों को तोड़ती है वहां के लिए कहा जाता है कि लोगों को कहीं और बसाने का इंतजाम किया गया है। लेकिन उन इंतजामात का कोई मतलब नहीं होता है। उन झुग्गियों में रहने वाले की छोटी मोटी नौकरी और छोटा मोटा रोजगार वही पर होता है। इसलिए वे कहीं और नही जाते हैं। बहरहाल, भूगोल बदला जा रहा है तो सरकार के पास क्या कोई बड़ी योजना है या यूं ही सब जगह खाली करा कर कोई सरकारी इमारत बनने वाली है?
