केंद्र सरकार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के मामले में पिछले कई महीने से घिरी है। कॉकरोच जनता पार्टी और देश भर के छात्रों के दबाव में सरकार ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करा लिया। लेकिन उसके बाद नया तमाशा शुरू हो गया है। सरकार ने पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कराया तो पार्ट टाइम शिक्षा मंत्री को काम सौंप दिया। दो बड़े मंत्रालय संभाल रहे प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे तदर्थ तरीके से काम कर रहे हैं। इससे पहले सरकार ने उच्च शिक्षा के सचिव विनीत जोशी को हटा दिया। हालांकि हटाना कोई पनिशमेंट नहीं था क्योंकि उनको पंचायती राज का सचिव बनाया गया। लेकिन शिक्षा विभाग में असली तमाशा उसके बाद शुरू हुई है।
विनीत जोशी को उच्च शिक्षा से हटा कर पंचायती राज का सचिव बनाया गया। उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया। 23 जुलाई को उनकी पोस्टिंग हुई। लेकिन वे ज्वाइन ही नहीं कर सके क्योंकि विनीत जोशी ने पद नहीं छोड़ा। विनीत जोशी ने पद इसलिए नहीं छोड़ा क्योंकि उनकी जिन विवेक भारद्वाज की जगह पंचायती राज में जाना था वे 31 जुलाई को रिटायर होने वाले थे पर नहीं हुए। सो, वे अपने पद पर बने रहे और इस वजह से जोशी भी अपने पद पर रहे। अब बिना ज्वाइन किए गंगवार वहां से विदा हो गए। उनकी जगह अर्चना गौर मुखर्जी को नया उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है। सोचें, इतने हंगामे और छात्रों के इतने अहम सरोकार के बावजूद सरकार को कोई परवाह नहीं है। पिछले तीन हफ्ते से तदर्थ शिक्षा मंत्री और तदर्श शिक्षा सचिव से उच्च शिक्षा विभाग का काम चल रहा है।
